आलोट में किसान अब मक्का की ओर: लागत में कमी, मुनाफा ज्यादा

मध्य प्रदेश के आलोट क्षेत्र में इस वर्ष रबी की फसल से पहले ही किसानों ने खेतों में हल चलाना शुरू कर दिया है। प्रारंभिक बारिश से खेतों में नमी आ गई है, जिससे बुआई का कार्य तेजी से शुरू हो गया है। क्षेत्रीय किसान अब पारंपरिक फसलों से हटकर मक्का की ओर रुख कर रहे हैं।

मक्का बन रही है पसंदीदा फसल

इस साल कई किसानों ने सोयाबीन के साथ-साथ मक्का की खेती का भी फैसला किया है। इसका मुख्य कारण मक्का की अपेक्षाकृत बेहतर उपज और बाज़ार भाव है। जहां सोयाबीन की उपज और दाम में लगातार गिरावट देखी जा रही है, वहीं मक्का ने किसानों को एक नया विकल्प दिया है।

सोयाबीन की समस्याओं से तंग किसान

पिछले कुछ वर्षों में सोयाबीन की खेती करने वाले किसानों को लगातार घाटा उठाना पड़ा है। अत्यधिक वर्षा, फसल रोग और कम मंडी भाव से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। एक बीघा में सोयाबीन की लागत ₹10,000 से अधिक आती है, लेकिन यदि उपज 3 क्विंटल से कम हो जाए तो लागत भी नहीं निकलती।

मुख्य समस्याएं:

  • अत्यधिक वर्षा से फसल खराब होना
  • कीट एवं बीमारियों का बढ़ता प्रकोप
  • मंडी में घटती कीमतें (₹4,000/क्विंटल तक)

मक्का की खेती: कम लागत, अधिक उत्पादन

मक्का की खेती में किसानों को बेहतर लाभ की संभावना दिख रही है। प्रति बीघा मक्का की खेती पर लगभग ₹15,000 की लागत आती है, लेकिन सही मौसम और देखरेख में उपज 15 क्विंटल तक हो सकती है। वर्तमान में मक्का का बाज़ार मूल्य ₹2,400 प्रति क्विंटल से अधिक चल रहा है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।

लाभ की गणना:

  • लागत: ₹15,000 प्रति बीघा
  • उपज: 15+ क्विंटल
  • बाजार मूल्य: ₹2,400 प्रति क्विंटल
  • संभावित आय: ₹36,000+

सरकार दे रही मक्का पर अनुदान

राज्य सरकार भी मक्का उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता दे रही है। किसानों को ₹4,000 प्रति हेक्टेयर का अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा दी गई है, जिससे किसान सीधे DBT के तहत राशि प्राप्त कर सकते हैं।

मुख्य बातें:

  • ₹4,000 प्रति हेक्टेयर का अनुदान
  • ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन
  • सीधे बैंक खाते में भुगतान

आगामी सीजन के लिए किसानों की रणनीति

किसानों ने मौसम पूर्वानुमान और पिछले वर्षों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए फसल योजना बनाई है। मक्का को अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि प्रमुख फसल के रूप में देखा जा रहा है। इसमें जोखिम कम, उत्पादन ज्यादा और सरकारी समर्थन भी है। ऐसे में मक्का के बढ़ते रकबे से आलोट क्षेत्र की कृषि दिशा बदलती नजर आ रही है।

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