मुरैना में मंत्री का कट्टा बयान: कांग्रेस प्रत्याशी को लेकर दिया गया बयान बना राजनीतिक मुद्दा

कंषाना ने कांग्रेस प्रत्याशी पर सीधा हमला बोला

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने एक ऐसा बयान दे डाला, जिससे प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। उन्होंने अपने भाषण में कांग्रेस प्रत्याशी के बारे में कहा कि अगर वे जीत जाते और किसी ने कुछ कहा होता तो वह ‘कट्टा निकालकर सीधा मार देते’। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विपक्ष ने मंत्री की निंदा शुरू कर दी।

किस संदर्भ में आया यह बयान?

कंषाना शुक्रवार को मुरैना के काशीपुर गांव में एक चौपाल के भूमिपूजन कार्यक्रम में पहुंचे थे। उनके साथ सांसद शिवमंगल सिंह तोमर भी मौजूद थे। मंच से भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि “हमारे सांसद ठाकुर जाति के हैं, लेकिन स्वभाव से बनिया हैं। अगर कोई इन्हें गाली दे भी दे तो यह पत्थर उखाड़ेंगे, लेकिन सामने वाले को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। लेकिन कांग्रेस का प्रत्याशी अगर जीत जाता तो वह सीधा कट्टा चला देता।”

कांग्रेस का तीखा पलटवार

कांग्रेस ने इस बयान को अराजक और लोकतंत्र विरोधी करार दिया है। पूर्व विधायक और कांग्रेस प्रत्याशी सत्यपाल सिंह नीटू सिकरवार ने कहा कि मंत्री का यह बयान उनकी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंषाना का व्यवहार उनके राजनीतिक डर को उजागर करता है। सिकरवार ने कहा कि “जिसके अंदर डर होता है, वही इस तरह की भाषा का प्रयोग करता है।”

पूर्व मुकाबलों की याद ताजा

नीटू सिकरवार ने यह भी कहा कि उनके और कंषाना के परिवारों के बीच पूर्व में विधानसभा चुनावों में मुकाबले हो चुके हैं, जिससे मंत्री के मन में राजनीतिक असुरक्षा की भावना है। उनका मानना है कि इस तरह की बयानबाजी कर मंत्री जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।

मंच से हुई अभद्र भाषा की निंदा

कई सामाजिक संगठनों ने मंत्री के बयान की आलोचना करते हुए इसे असंवैधानिक और सामाजिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है। विपक्ष का कहना है कि एक मंत्री से इस तरह की भाषा की अपेक्षा नहीं की जा सकती, विशेषकर तब जब जनता के बीच मौजूद हों।

पूर्व बयान भी विवादों में रहे

यह पहली बार नहीं है जब कृषि मंत्री कंषाना ने ऐसा विवादास्पद बयान दिया हो। इससे पहले खाद वितरण में समस्या को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा था कि यह सहकारिता विभाग का काम है, जिससे विपक्ष ने उनके अल्पज्ञान पर निशाना साधा था।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने तब भी कहा था कि “प्रदेश में ऐसे मंत्री नियुक्त हैं जिन्हें अपने विभाग की जानकारी तक नहीं है।”

मुरैना में सामने आया यह बयान अब राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन चुका है। जहां भाजपा खामोश है, वहीं कांग्रेस इसे चुनावी रणनीति में शामिल करने का संकेत दे चुकी है।

राजनीति में शब्दों का वजन बहुत होता है और जब वह किसी मंत्री के मुख से निकलें तो उनका प्रभाव और गहरा होता है। कृषि मंत्री कंषाना के बयान ने सिर्फ विपक्ष को मौका नहीं दिया, बल्कि भाजपा की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोकतंत्र में भाषा की मर्यादा बनाए रखना केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नैतिकता का भी विषय है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या मंत्री से कोई स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

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