इंदौर के खुड़ैल क्षेत्र स्थित सरकारी स्कूल में नाबालिग छात्राओं से शोषण और अमानवीय व्यवहार का चौंकाने वाला मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि स्कूल के दो शिक्षक नाबालिग छात्राओं के साथ अश्लील भाषा का प्रयोग करते थे, मारपीट करते थे और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करते थे। यह मामला 9 साल से दबा हुआ था, पर अब पीएमओ तक पहुंच गया है। इंदौर की अन्य बड़ी खबरें यहां पढ़ें।
एसडीएम जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
महिला एसडीएम नीता राठौर की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चियों से मारपीट, गालियों और दोअर्थी बातें करने के अलावा छुट्टी मांगने पर बोतल में पेशाब करने के लिए मजबूर किया जाता था। कई छात्राओं ने बयान में कहा कि शिक्षकों ने स्कूल टाइम में घरेलू सामान तक मंगवाया। इस पर 2016 में आरटीआई एक्टिविस्ट जितेंद्र सिंह यादव ने लिखित शिकायत दी थी।

9 साल में FIR तक नहीं
जिला पंचायत ने 2016 में ही एसडीएम को जांच सौंपी थी। उन्होंने 2019 में रिपोर्ट सौंपकर शिक्षकों को तुरंत बर्खास्त करने की सिफारिश की थी, फिर भी किसी थाने में FIR दर्ज नहीं हुई। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता ने 2020 में भी रिमाइंडर दिया पर कार्रवाई शून्य रही।
स्कूल स्टाफ ने भी लगाए आरोप
स्कूल के अन्य स्टाफ और प्रिंसिपल ने भी दोनों शिक्षकों के गलत बर्ताव की पुष्टि की। बच्चियों के बयान और स्टाफ की रिपोर्ट में साफ जाहिर था कि आरोपी शिक्षक अक्सर स्कूल से गायब रहते थे और फर्जी दस्तावेज बनाते थे। पढ़ाई के दौरान भी बच्चियों पर दबाव बनाया जाता था।
PMO का दखल, हाईकोर्ट में याचिका की तैयारी
एफआईआर न होने से परेशान होकर कुमारी सपना प्रजापति ने प्रधानमंत्री कार्यालय को याचिका भेजी। पीएमओ ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सीएम हेल्पलाइन के डायरेक्टर को निर्देश दिया है। अब हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करने की तैयारी भी चल रही है।
कानूनी विकल्प और संवैधानिक जिम्मेदारी
वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्ण कुमार कुन्हारे ने बताया कि एसडीएम रिपोर्ट में सभी आरोप पुष्ट हैं, इसके बावजूद पुलिस ने कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया। एडवोकेट डॉ. रूपाली राठौर ने कहा कि शिक्षकों को शांति भंग की आशंका में जमानत दी गई, पर असल एफआईआर दर्ज न होना चौंकाता है।
छात्राओं की सुरक्षा क्यों जरूरी?
स्कूल में बच्चियों के साथ हुए इस तरह के शोषण से समाज में गहरा संदेश जाता है। बेटियों की सुरक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी है। अगर आप भी किसी प्रकार के शोषण के गवाह बनें, तो तुरंत राष्ट्रीय महिला आयोग या चाइल्डलाइन से संपर्क करें।
सख्त कदमों की जरूरत
स्कूलों में बच्चियों की गरिमा और सुरक्षा बनाए रखना जरूरी है। प्रशासन, अभिभावक और समाज मिलकर ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाएं, ताकि दोबारा कोई शिक्षक ऐसी हरकत न कर सके।




