इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने लोकल कपड़े अपनाने की मुहिम को फिर से तेज कर दिया है। 1 जुलाई से शुरू हुए इस नए चरण में कॉल सेंटर के जरिये हजारों ग्राहकों तक लोकल उत्पादों का संदेश पहुंचाया जा रहा है, ताकि विदेशी कपड़ों पर निर्भरता घटे।
लोकल कपड़ों को क्यों अपनाएं?
लोकल कपड़े न सिर्फ देश के कारीगरों को सशक्त बनाते हैं, बल्कि घरेलू रोजगार को भी मजबूती देते हैं। इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन का मानना है कि चीनी और बांग्लादेशी कपड़ों से बाजार में प्रतिस्पर्धा असमान बनती है, जिससे भारतीय व्यापारी नुकसान उठाते हैं।

कॉल सेंटर की मदद से जागरूकता
एसोसिएशन ने अपने विशेष कॉल सेंटर से अब तक 8,000 से ज्यादा लोगों को लोकल कपड़े अपनाने का संदेश दिया है। आने वाले दिनों में 10 लाख से अधिक कॉल करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं तक यह संदेश पहुंचे।
वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा
वोकल फॉर लोकल के संकल्प को पूरा करने के लिए 125 व्यापारिक संगठनों ने भी समर्थन किया है। इन सभी ने शपथ ली है कि वे विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करेंगे और भारतीय उत्पादों को महत्व देंगे।
ऑनलाइन बिक्री पर भी नजर
एसोसिएशन ने अपील की है कि ग्राहक ऑनलाइन भी विदेशी कपड़े न खरीदें, बल्कि आसपास के बाजार से ही लोकल कपड़े चुनें। यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी लोकल कारोबार को मजबूती देने में कारगर साबित होगा।
अभियान की रणनीति
इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने तय किया है कि आने वाले 30 दिनों तक कॉल सेंटर के माध्यम से लगातार उपभोक्ताओं को जोड़ने का काम किया जाएगा। त्योहारों के समय यह जागरूकता और अधिक असरदार साबित होगी।
10 लाख कॉल का लक्ष्य
पहले भी एसोसिएशन ने दो बार 10 लाख से ज्यादा कॉल किए थे। इस बार त्योहारों को देखते हुए विशेष तौर पर कॉल सेंटर का दायरा बढ़ाया गया है। ग्राहकों को प्रेरित करने के लिए सरल भाषा में लोकल उत्पादों के फायदों को समझाया जा रहा है।
समाज में नया संदेश
लोकल कपड़ों के प्रचार-प्रसार से समाज में आत्मनिर्भरता और स्थानीय ब्रांड के प्रति गर्व की भावना विकसित होती है। यही वजह है कि एसोसिएशन ने इस मुहिम को पूरे शहर में फैलाने की योजना बनाई है।
सकारात्मक पहल
लोकल कपड़ों को अपनाने से आप न सिर्फ एक उपभोक्ता की भूमिका निभा रहे हैं, बल्कि देश के विकास में भी योगदान दे रहे हैं। लोकल कपड़े चुनना एक जिम्मेदारीपूर्ण निर्णय है, जो हर नागरिक को लेना चाहिए।
हमारी सलाह
यदि आप भी इस लोकल आंदोलन का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो पास के बाजारों से खरीदारी करें और चीन-बांग्लादेशी कपड़ों का त्याग करें। इससे हमारे स्थानीय व्यापारी और कारीगर दोनों ही मजबूत होंगे। अधिक जानकारियां यहां पढ़ें।
इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन द्वारा चलाया गया यह अभियान सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम है। लोकल कपड़े खरीदकर हर व्यक्ति भारतीय अर्थव्यवस्था को सीधा समर्थन दे सकता है।




