इंदौर में शनिवार सुबह एक कॉलेज छात्रा पर उस वक्त हमला हो गया, जब वह परीक्षा देने के लिए घर से निकली थी। श्रीनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में चार आवारा कुत्तों ने अचानक उस पर धावा बोल दिया। लड़की खुद को बचाने की कोशिश कर ही रही थी कि कुत्तों ने उसे नीचे गिरा दिया और एक पैर पर गंभीर रूप से काटा।
- वीडियो में दिखी दहशत
- कैसे बचाई गई छात्रा?
- कुत्तों की बढ़ती संख्या की वजह
- नगर निगम की भूमिका
- हमले से जुड़े आंकड़े
- क्या है स्थायी समाधान?
कुछ समय तक संघर्ष करने के बाद छात्रा ने उन्हें भगाया, लेकिन कुत्तों का झुंड दोबारा लौटा और फिर हमला कर दिया।
वीडियो में दिखी दहशत
घटना पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसमें छात्रा का डर और दर्द साफ झलकता है। फुटेज में दिख रहा है कि किस तरह छात्रा अकेली कुत्तों से लड़ती है और कैसे वह जमीन पर गिरा दी जाती है।
कैसे बचाई गई छात्रा?
इस हमले के दौरान छात्रा की सहेली, जो स्कूटी से आगे जा रही थी, तुरंत वापस लौटी और कुत्तों को भगाया। छात्रा इतने सदमे में थी कि चक्कर खाकर बैठ गई। पास के एक रहवासी दंपती ने उसे तुरंत अपने घर लाकर प्राथमिक इलाज दिया और अस्पताल पहुंचाया।
कुत्तों की बढ़ती संख्या की वजह
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने की बड़ी वजह कॉलोनी में खुले में डाला जा रहा भोजन है। खासकर रात में फेंका जाने वाला मांसाहारी भोजन उन्हें आक्रामक बना रहा है।
साफ-सफाई के अभाव और खाद्य कचरे की भरमार के चलते कुत्तों के झुंड नियमित रूप से इस इलाके में डेरा जमाए रहते हैं।
नगर निगम की भूमिका
रहवासियों ने कई बार नगर निगम से शिकायत की है लेकिन समाधान नहीं हो सका है। निगम की गाड़ी कचरा उठाने तो आती है, परंतु रात में फिर कचरा डाला जाता है। इससे सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है और कुत्तों की संख्या में इजाफा हो रहा है।
हमले से जुड़े आंकड़े
शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जुलाई के बीच 24 हजार से अधिक लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो चुके हैं। हालांकि इनमें अधिकांश को समय पर टीका मिल गया, लेकिन भय और असुरक्षा की भावना लोगों में बढ़ गई है।
हर उम्र के लोग प्रभावित
बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इस समस्या से त्रस्त हैं। सबसे ज्यादा हमले सुबह या रात के समय होते हैं जब इलाके सुनसान होते हैं।
क्या है स्थायी समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि कुत्तों की नसबंदी कार्यक्रम को और तेज करने की जरूरत है। इसके साथ ही खाद्य अपशिष्ट को खुले में डालने पर सख्त प्रतिबंध लगाना होगा।
नगर निगम को स्थानीय लोगों के सहयोग से एक सतत निगरानी और नियंत्रण प्रणाली लागू करनी चाहिए। जब तक यह नहीं किया जाएगा, ऐसी घटनाएं रुकेंगी नहीं।
इंदौर की यह घटना केवल एक छात्रा पर हमला नहीं है, बल्कि प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक चेतावनी है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।






