IndusInd Bank शेयरों की खबर: गुरुवार, 29 मई को NSE पर IndusInd Bank के शेयरों में 1% से अधिक की तेजी दर्ज की गई और यह ₹814.30 प्रति शेयर के स्तर पर ट्रेड कर रहे थे। यह तेजी ऐसे समय पर आई है जब भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने बैंक के पूर्व CEO सुमंत कथपालिया समेत पाँच वरिष्ठ अधिकारियों पर अंदरूनी ट्रेडिंग के आरोप में प्रतिबंध लगा दिया है।

SEBI ने बुधवार को जारी अंतरिम आदेश में बताया कि इन अधिकारियों ने बैंक के डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में हुई गड़बड़ियों से संबंधित गोपनीय जानकारी (UPSI) के आधार पर शेयरों में ट्रेडिंग की। इसके तहत ₹19.78 करोड़ की राशि जब्त की गई है।
इन प्रतिबंधित अधिकारियों में अरुण खुराना (पूर्व डिप्टी CEO), सुशांत सौरव (हेड, ट्रेजरी ऑपरेशंस), रोहन जठन्ना (हेड, GMG ऑपरेशंस) और अनिल मार्को राव (CAO, कंज़्यूमर बैंकिंग) शामिल हैं।
SEBI की जांच में यह भी सामने आया कि बैंक की आंतरिक टीम नवंबर 2023 से ही इन गड़बड़ियों से अवगत थी। एक ईमेल में ₹1,749.98 करोड़ के नुकसान का अनुमान व्यक्त किया गया था। यह जानकारी RBI को प्रस्तुत करने की तैयारी भी चल रही थी, परंतु सार्वजनिक रूप से इसका खुलासा केवल 10 मार्च 2025 को हुआ।
बैंक ने इन आंकड़ों के सत्यापन के लिए जनवरी 2024 में KPMG को नियुक्त किया, जिसने ₹2,093 करोड़ का नकारात्मक प्रभाव रिपोर्ट किया।
इस मामले के सामने आने के बाद 29 अप्रैल को CEO कथपालिया और डिप्टी CEO खुराना ने इस्तीफा दे दिया। वर्तमान में बैंक की दैनिक कार्यप्रणाली को देखने के लिए एक कार्यकारी समिति बनाई गई है।
मार्च तिमाही में बैंक को ₹2,329 करोड़ का रिकॉर्ड नुकसान हुआ, जो अब तक का सबसे बड़ा घाटा है। इसमें ₹1,960 करोड़ का नुकसान गलत डेरिवेटिव ट्रेड की मान्यता से, ₹674 करोड़ ब्याज आय रिवर्सल से और ₹172 करोड़ की धोखाधड़ी को भी शामिल किया गया।
बैंक की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने आंतरिक नियंत्रण प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया, और इस मामले की जानकारी भारत सरकार को दी गई है।
नया नेतृत्व और भविष्य की राह:
पूर्व CEO के इस्तीफे के बाद अब बैंक का नेतृत्व गैर-कार्यकारी चेयरमैन सुनील मेहता के हाथों में है। उन्होंने Q4 FY25 नतीजों में आश्वासन दिया कि अब सभी गड़बड़ियों की पहचान और समाधान कर लिया गया है और FY26 की शुरुआत “क्लीन स्लेट” के साथ होगी।





