रतलाम के लालगुवाड़ी क्षेत्र के एक शासकीय प्राथमिक विद्यालय में मध्यान्ह भोजन योजना के तहत बच्चों को पौष्टिक भोजन देने की बजाय सेव-परमल दिए जाने का मामला सामने आया है। यह घटना न केवल पोषण संबंधी जिम्मेदारियों की अनदेखी को दर्शाती है, बल्कि सरकारी व्यवस्था में व्याप्त लापरवाही की भी पोल खोलती है।

रसोइयों की गैरमौजूदगी बनी मुख्य वजह
24 जून को विद्यालय के मीनू के अनुसार बच्चों को खीर-पूड़ी परोसी जानी थी, लेकिन दोनों रसोइए अनुपस्थित थीं। एक रसोइया बीमार थी, जबकि दूसरी ने अवकाश ले रखा था। विद्यालय की प्राचार्य ने तत्काल सेव-परमल मंगवाकर बच्चों को खिला दिया।
सीईओ स्तर पर जांच शुरू
15 जुलाई को वीडियो वायरल होते ही जिला पंचायत के सीईओ और अतिरिक्त सीईओ स्कूल पहुंचे। रजिस्टर, उपस्थित कर्मचारी और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई। पूरे मामले में कई प्रशासनिक खामियां उजागर हुईं।
मरम्मत राशि से खरीदी गई शिक्षण सामग्री
विद्यालय के भवन की मरम्मत के लिए प्राप्त ₹10,000 की राशि का उपयोग बच्चों के लिए टाट पट्टी, चार्ट और अन्य सामग्री में कर दिया गया। यह कार्य वित्तीय अनुशासन के खिलाफ माना गया और इसे गबन की श्रेणी में रखा गया।
निरीक्षण रजिस्टर में नहीं था उल्लेख
जांच में सामने आया कि जनशिक्षक ने 24 जून की घटना का कोई उल्लेख रजिस्टर में नहीं किया था। बाद में जब उच्च अधिकारी पहुंचे तब आनन-फानन में संबंधित प्रविष्टि दर्ज की गई।
मुख्य शिक्षा अधिकारी अनुपस्थित
घटना के दिन जिला परियोजना समन्वयक और सहायक कार्यक्रम समन्वयक विद्यालय नहीं पहुंचे, बल्कि किसी अन्य गांव में व्यस्त थे। मोबाइल पर संपर्क भी नहीं हो सका, जिससे उनकी भूमिका पर सवाल उठे।
पांचों जिम्मेदारों को नोटिस
- विजया मैड़ा – प्रधानाध्यापक
- शांति बाई – समूह अध्यक्ष
- कमला बाई – समूह सचिव
- विवेक नागर – सहायक कार्यक्रम समन्वयक
- भूपेंद्र सिंह – विकासखंड अकादमिक समन्वयक
बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़
सेव-परमल जैसे सूखे खाद्य पदार्थ बच्चों के स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते हैं। ऐसी घटनाएं उनके पोषण स्तर पर प्रतिकूल असर डालती हैं।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
जांच प्रतिवेदन कलेक्टर को सौंपा जाएगा। वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले की समीक्षा कर रहे हैं और संबंधितों से तीन दिन में जवाब मांगा गया है।
समाज की जागरूकता आवश्यक
अभिभावकों और समाज को इस तरह की लापरवाहियों पर निगरानी रखनी चाहिए ताकि बच्चों के अधिकार सुरक्षित रह सकें।
जवाबदेही और सुधार की आवश्यकता
यह घटना शिक्षा और पोषण जैसे मौलिक अधिकारों पर संकट है। लापरवाहियों की जवाबदेही तय करना और मिड डे मील योजना को ईमानदारी से लागू करना समय की मांग है।
बाहरी स्रोत: मिड डे मील नीति विवरण
आंतरिक लिंक: रतलाम शिक्षा क्षेत्र की अन्य खबरें




