
रतलाम छात्रावास में खराब भोजन और अनुशासन पर भड़कीं छात्राएं, वार्डन और ABVP कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हुई।
शिकायत का कारण
रतलाम के आदिवासी सीनियर कन्या छात्रावास में रह रहीं छात्राओं ने वार्डन के दुर्व्यवहार और भोजन की खराब गुणवत्ता को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्राओं ने बताया कि उन्हें कच्चा खाना, खराब व्यवहार और ‘पर्दे में रहने’ जैसे निर्देशों का सामना करना पड़ता है।
आंदोलन का रूप
मंगलवार को छात्राएं स्कूल छोड़कर जनसुनवाई में हाथों में दाल और बैग लेकर पहुंचीं। छात्रा सीमा मचारे ने कहा कि उन्हें अगर कुछ हुआ तो ज़िम्मेदार कौन होगा? यह सवाल प्रशासन के सामने गंभीर चुनौती बनकर खड़ा हुआ।
ABVP का तीखा जवाब
ABVP के कार्यकर्ताओं ने छात्राओं का समर्थन करते हुए वार्डन के बयान का कड़ा विरोध किया। वार्डन के “क्या बच्चियों को आपके आगे परोस दूं?” जैसे बयान ने विवाद को और अधिक बढ़ा दिया। जिला संयोजक सत्यम दवे ने तीन दिन में कार्रवाई की चेतावनी दी।
वार्डन की सफाई

वार्डन सुगना मईड़ा ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें साजिशन फंसाया जा रहा है। उन्होंने चाय, नाश्ते और भोजन की व्यवस्था को संतोषजनक बताया और कहा कि “घूंघट” जैसी कोई बात उन्होंने नहीं कही।
प्रशासन का दखल
सहायक आयुक्त रंजना सिंह और थाना प्रभारी गायत्री सोनी छात्राओं से मिलने पहुंचीं। छात्राओं से कहा गया कि वे स्टेटमेंट दें ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। प्रशासन जांच कमेटी की सिफारिश करेगा।
आगे का रास्ता
ABVP और छात्राएं वार्डन को हटाने की मांग पर अड़ी हैं। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो जिला स्तर पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है। वहीं, प्रशासन अब जांच प्रक्रिया के तहत मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रहा है।
छात्रावास की समस्याएं केवल व्यवस्था तक सीमित नहीं रहीं, अब यह मुद्दा भरोसे और संवाद की कमी का बन चुका है। छात्राओं का आत्मविश्वास बहाल करना और दोषियों पर कार्रवाई करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।




