मध्यप्रदेश में मानसून की मार से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। खासकर गुना और विदिशा जिलों में हालात गंभीर हो चुके हैं। गुना जिले में बीते 24 घंटे में रिकॉर्ड 12.92 इंच वर्षा दर्ज की गई है, जिससे कलोरा डैम की वेस्ट बीयर टूट गई है और पूरा डैम टूटने का खतरा बन गया है। वहीं, विदिशा में बेतवा नदी के उफान से कई मंदिर जलमग्न हो चुके हैं।

गुना: डैम की वेस्ट बीयर टूटी, गांवों में खतरा
गुना जिले में कलोरा डैम की वेस्ट बीयर रात के समय टूट गई, जिससे सिंगापुर, तुमड़ा, कुड़का, बंधा सहित कई गांवों में पानी भर गया है। बनियानी, मामली और बिलोदा जैसे गांव जो राजस्थान सीमा से लगे हैं, वहां बाढ़ का सीधा असर देखा जा रहा है।
सेना और बचाव दल सक्रिय
प्रशासन ने हालात की गंभीरता को देखते हुए सेना और NDRF की टीमों को तैनात कर दिया है। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और राहत शिविर बनाए गए हैं।
विदिशा में बेतवा नदी ने मचाया कहर
विदिशा जिले में लगातार बारिश और बेतवा नदी के उफान ने कोहराम मचा दिया है। भोपाप रोड रंगई क्षेत्र के गणेश मंदिर समेत कई छोटे-बड़े मंदिर जलमग्न हो गए हैं। कई घरों में पानी घुस गया है और ग्रामीणों को अपने मकान छोड़ने पड़े हैं।
बच्चों की जान बची, महिला की मौत
ग्यारसपुर क्षेत्र में बहाव में बहे दो बच्चों को ग्रामीणों ने समय रहते बाहर निकाल लिया। वहीं शमशाबाद तहसील के नहरयाई गांव में मकान गिरने से 60 वर्षीय महिला की मौत हो गई।
अन्य जिलों की स्थिति
- भोपाल: स्कूलों की छुट्टी घोषित, कोलांस नदी और बड़ा तालाब खतरे के निशान पर।
- नर्मदापुरम: तवा डैम के 9 गेट खुले, एक लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
- मंडला: नैनपुर में पुल पर फंसे युवक को SDRF ने बचाया।
- दमोह: ब्यारमा नदी उफान पर, ग्रामीणों को रेस्क्यू किया गया।
- सीहोर: नर्मदा घाट और पुल जलमग्न।
मौसम विभाग का चेतावनी बुलेटिन
IMD ने गुना, श्योपुर, नीमच, मंदसौर, राजगढ़, आगर-मालवा में रेड अलर्ट जारी किया है। यहां अगले 24 घंटे में 200 मिमी से अधिक बारिश की संभावना है। अन्य जिलों जैसे भोपाल, उज्जैन, विदिशा, सीहोर में भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
बारिश की जिलेवार स्थिति
| जिला | वर्षा (इंच) |
|---|---|
| गुना | 12.92 |
| रायसेन | 4.5 |
| भोपाल | 1.9 |
| शाजापुर | 1.7 |
| नरसिंहपुर | 1.2 |
| सागर | 1.2 |
| इंदौर | 0.5 |
| श्योपुर | 0.75 |
| जबलपुर | 0.5 |
राज्य में अब तक की औसत बारिश
राज्य में अब तक 26.2 इंच औसत वर्षा दर्ज की गई है जो सामान्य औसत 16.9 इंच से 9.3 इंच अधिक है। इससे साबित होता है कि इस साल मानसून विशेष रूप से सक्रिय है।
पूरा बारिश कोटा पार करने वाले जिले
- ग्वालियर
- शिवपुरी
- छतरपुर
- श्योपुर
- टीकमगढ़
- निवाड़ी
- अशोकनगर
- मुरैना
इतिहास में सबसे ज्यादा वर्षा वाले रिकॉर्ड
- भोपाल: 1986 में जुलाई में 41 इंच बारिश
- इंदौर: 1913 में एक दिन में 11.5 इंच वर्षा
- जबलपुर: 1930 में जुलाई में 45 इंच वर्षा
- ग्वालियर: 1935 में जुलाई में 24.5 इंच
- उज्जैन: 2015 में जुलाई में 36 इंच
अगले दो दिनों की स्थिति
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में दो सक्रिय ट्रफ लाइन और एक लो प्रेशर एरिया सक्रिय है, जिससे 48 घंटे तक बारिश जारी रह सकती है। लोगों को सुझाव दिया गया है कि वे नदी, नालों और डूब क्षेत्र से दूर रहें।
मध्यप्रदेश में बारिश ने रफ्तार पकड़ ली है और इसका असर अब विकराल रूप ले चुका है। डैम फूटने से लेकर मंदिरों के जलमग्न होने तक की घटनाएं बता रही हैं कि इस बार मानसून चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। प्रशासन अलर्ट है, लेकिन आमजन की सतर्कता ही जान-माल की रक्षा कर सकती है।




