ग्वालियर में मासूम की दर्दनाक मौत: करंट से झुलसे 8 साल के बच्चे की मौत, FIR में गैर इरादतन हत्या की धारा

ग्वालियर के तिकोनिया क्षेत्र में 8 वर्षीय बच्चे की करंट लगने से मौत। डीजे संचालकों ने 20 रुपए देकर भेजा था नाले में। अब गैर इरादतन हत्या की FIR दर्ज।

हादसे की शुरुआत कैसे हुई?

ग्वालियर शहर के मुरार उपनगर में गुरुवार को एक दिल दहला देने वाली घटना हुई। तिकोनिया क्षेत्र में डीजे और टेंट व्यवसाय से जुड़े दो युवकों ने बिजली का तार नाले के दूसरी ओर ले जाने के लिए एक आठ वर्षीय गरीब बच्चे को सिर्फ 20 रुपये का लालच देकर नाले में उतार दिया। नाले में पहले से खुले तारों से करंट प्रवाहित हो रहा था। नतीजा – मासूम बच्चा झुलस गया और मौके पर ही दम तोड़ दिया।

आरोपी कौन हैं और उन्होंने क्या किया?

पुलिस जांच में सामने आया कि इस घटना के पीछे हेमंत और मनोज जाटव नामक दो युवक हैं, जिनका पास ही टेंट और डीजे का गोदाम है। वे अवैध रूप से बिजली जोड़ने का प्रयास कर रहे थे। उन्हें जब तार दूसरी ओर ले जाना था, तो उन्होंने मजदूर परिवार के बच्चे को चंद पैसों का प्रलोभन देकर उतार दिया।

बच्चे ने जैसे ही तार को हाथ में लिया, नाले में फैले करंट की चपेट में आ गया। यह देखकर दोनों युवक घबरा गए और मौके से भाग निकले।

बच्चे की पहचान और घटनास्थल पर हालात

मृतक की पहचान शिवा कुशवाह के रूप में हुई है। वह स्थानीय मजदूर का बेटा था, जो रोज की तरह सुबह घर के बाहर खेल रहा था। शिवा के पिता रोजी-रोटी के लिए मजदूरी पर चले गए थे, और उनके पास मोबाइल फोन नहीं था। इसी वजह से उन्हें बेटे की मौत की जानकारी भी शाम तक नहीं मिल सकी।

स्थानीय लोगों ने जब उसे नाले में तड़पते देखा, तो फौरन अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

पुलिस की तफ्तीश और कानूनी कार्रवाई

घटना की सूचना मिलने पर मुरार थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी धर्मवीर सिंह खुद घटनास्थल पर पहुंचे। शुक्रवार देर रात गैर इरादतन हत्या की FIR दर्ज की गई।

पुलिस के अनुसार:

“यह लापरवाही नहीं, आपराधिक उपेक्षा है। आरोपी बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर रहे थे। इसलिए उन पर आईपीसी की धारा 304A (गैर इरादतन हत्या) लगाई गई है।”

परिवार का दर्द और समुदाय की प्रतिक्रिया

शिवा की मौत से पूरा मोहल्ला स्तब्ध है। पड़ोसियों का कहना है कि लड़का मेहनती था और हमेशा दूसरों की मदद को तैयार रहता था। उसकी मौत के बाद तिकोनिया क्षेत्र में आक्रोश और शोक दोनों व्याप्त हैं।

पिता का कहना है:

“अगर उसे 20 रुपये का लालच न दिया होता, तो आज मेरा बेटा जिंदा होता। किसी की गलती का खामियाज़ा हमें भुगतना पड़ा है।”

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