उज्जैन में महंत रामेश्वर दास ने राजा रघुवंशी और सोनम के लिए विशेष तांत्रिक अनुष्ठान किया। उनके मुताबिक, क्रिया के पांच दिन बाद राजा का शव मिला। जानें कैसे हुआ ये सब।

भारत की तंत्र विद्या सदियों से रहस्यों और मान्यताओं से भरी रही है। ऐसा ही एक वाकया सामने आया है उज्जैन से, जहां एक गुमशुदा व्यक्ति की तलाश में किया गया तांत्रिक अनुष्ठान, उसके शव की बरामदगी की पूर्व सूचना बन गया।
इस रहस्यमयी घटना में मुख्य पात्र हैं राजा रघुवंशी और उनकी पत्नी सोनम, जिनके गायब होने पर परिवार ने उज्जैन के चिंतामन रोड स्थित अखाड़ा परिषद के महंत रामेश्वर दास से संपर्क किया।
गायब राजा और तांत्रिक क्रिया
राजा रघुवंशी 23 मई से लापता थे। परिवारजन ने जब पुलिस और रिश्तेदारों से भी निराशा देखी, तो आध्यात्मिक सहारे की ओर रुख किया। 28 मई को परिवार के प्रतिनिधि अभिषेक ने महंत से मिलकर अनुष्ठान कराने की अपील की।
महंत ने अनुष्ठान शुरू किया और 2 जून को राजा का शव मिलने की खबर आई।
तंत्र क्रिया की विधि
- राजा के वस्त्र में एक यंत्र रखा गया।
- उसे गोबर से लपेटा गया और 50 किलो वजन से दबाया गया।
- पांच दिन तक रोज मंत्रों का जाप किया गया।
- यंत्र के साथ एक विशेष पर्ची तैयार की गई जिस पर बीज मंत्र लिखे थे।
महंत का दावा है कि इस विधि के माध्यम से गुम व्यक्ति के संबंध में ‘ऊर्जा संकेत’ प्राप्त होते हैं।
गुप्त शक्ति या इत्तेफाक?
क्या यह सब तंत्र की शक्ति थी या सिर्फ संयोग? यह सवाल सबके मन में है। लेकिन महंत का कहना है कि ये प्राचीन पद्धति सिद्ध साधकों के लिए सत्य साबित होती रही है।
मंत्र और बीजाक्षर
अनुष्ठान में प्रयुक्त बीज मंत्रों का विशेष महत्व होता है। एक विशेष माला और समय का चयन कर इन्हें सिद्ध किया जाता है। महंत ने बताया कि उन्होंने पांच अलग-अलग मंत्रों के संयोजन से राजा की स्थिति का पता लगाने की क्रिया की।
फोटो और कपड़े क्यों बहाए?
राजा के शव मिलने और सोनम के सामने आने के बाद, उनके फोटो और वस्त्र को शुद्धिकरण के रूप में शिप्रा नदी में प्रवाहित कर दिया गया ताकि कोई और उसका दुरुपयोग न कर सके।




