
ग्लैंडर संक्रमण क्या है?
ग्लैंडर एक घातक जीवाणुजनित बीमारी है जो खासकर घोड़ों, गधों और खच्चरों को प्रभावित करती है। यह रोग संक्रमित पशुओं के संपर्क से फैलता है और इंसानों में भी इसका खतरा होता है। Burkholderia mallei नामक जीवाणु इसके लिए ज़िम्मेदार होता है।
10 घोड़ों की मौत की पुष्टि
हैदराबाद से जबलपुर लाए गए कुल 57 घोड़ों में से 10 की मौत हो चुकी है। एक घोड़े की रिपोर्ट ग्लैंडर पॉजिटिव आई है, जबकि अन्य की रिपोर्ट निगेटिव बताई गई है। पशु चिकित्सा विभाग ने दो घोड़ों के सैंपल दोबारा जांच के लिए भेजे थे, जिनमें से एक पहले ही मर चुका था।
तत्काल अलर्ट जारी
घोड़ों की लगातार हो रही मौतों को देखते हुए विभाग ने अलर्ट जारी किया है। भोपाल से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम जबलपुर भेजे जाने की संभावना जताई गई है।
रैपुरा अस्तबल की हालत चिंताजनक
रैपुरा गांव के अस्तबल में रखे गए घोड़ों को पर्याप्त स्थान, खुली हवा और समय पर दवा नहीं मिल रही थी। इन जानवरों को महंगे और नाजुक बताया गया है जिन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता थी।
सुविधाओं का अभाव
स्थानीय प्रशासन ने इस बात की पुष्टि की है कि अस्तबल में घोड़ों को बांधकर रखा गया था, जिससे उनकी हालत बिगड़ गई। समय पर इलाज ना मिलने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई।
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं की भूमिका
लवान्या शेखावत ने PETA के माध्यम से हैदराबाद रेसकोर्स में हो रहे घोड़े के शोषण की सूचना दी थी। उनके अनुसार, HPSL के नाम पर अवैध गतिविधियां चल रही थीं और यह घोड़े सुरेश पलादुगू से जुड़े हैं।
ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क का खुलासा
फिलीपींस में इन घोड़ों की रेसिंग पर करोड़ों का ऑनलाइन सट्टा लगाया जा रहा था। जब यह जानकारी तेलंगाना सरकार तक पहुंची तो कार्रवाई की गई। छापे से पहले घोड़ों को जबलपुर भेज दिया गया।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका
23 मई को एडवोकेट उमेश त्रिपाठी ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने बताया कि 154 घोड़े अलग-अलग स्थानों पर भेजे गए ताकि सुरेश पलादुगू पर कार्रवाई से बचा जा सके।
रेसिंग घोटाले की जड़ें गहरी
घोड़ों की रेसिंग एप्स के जरिए फर्जी नामों से सट्टा कराया जा रहा था। हर घोड़े को एक कोड दिया गया था जिसमें मालिक की जानकारी छुपाई गई। इस घोटाले की जांच के बाद कई खुलासे सामने आने की उम्मीद है।
ग्लैंडर संक्रमण और घोड़ों की मौत का यह मामला सिर्फ पशु कल्याण का नहीं बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय अवैध नेटवर्क का भी संकेत देता है। प्रशासन, पशु अधिकार संस्थाएं और न्याय व्यवस्था सभी को मिलकर इस प्रकरण को निष्पक्ष रूप से निपटाना होगा।




