उमरिया जिले में पंचायत समीक्षा के बाद 7 सचिव निलंबित, अधिकारियों को नोटिस

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मुख्य कार्यपालन अधिकारी की अध्यक्षता में बैठक

शनिवार को उमरिया जिला पंचायत में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभय सिंह ने की। बैठक का उद्देश्य केंद्र व राज्य शासन की प्रमुख ग्रामीण योजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन करना था। इसमें ग्राम पंचायत सचिवों व अन्य क्षेत्रीय अधिकारियों की जिम्मेदारी और कार्य निष्पादन की पड़ताल की गई।

किसे क्यों मिली सजा?

बैठक के दौरान सामने आया कि कई योजनाओं में निर्धारित समयसीमा के अनुरूप कार्य नहीं हो रहे थे। इस पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बांका सेक्टर के उपयंत्री दीपक तिवारी को नोटिस जारी किया। इसके अलावा, सात पंचायत सचिवों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

निलंबित सचिवों की सूची

जिन पंचायत सचिवों को निलंबित किया गया है, उनके नाम और ग्राम पंचायतें निम्नलिखित हैं:

  1. चंदवार
  2. पथरहठा
  3. पतरेई
  4. सलैया-13
  5. कल्दा
  6. पटपरा

इन सचिवों पर समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत न करना, योजनाओं के क्रियान्वयन में ढिलाई और फील्ड विजिट रिपोर्ट्स में गड़बड़ी के आरोप हैं।

रोजगार सहायकों पर कार्रवाई

सिर्फ सचिव ही नहीं, बल्कि कई रोजगार सहायकों पर भी प्रशासन ने सख्ती दिखाई। इनके विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रभावित ग्राम पंचायतों की सूची इस प्रकार है:

  • बेलसरा
  • भरौला
  • खेरवाखुर्द
  • किरनतालकला
  • अंचला
  • बांका
  • बरहटा
  • धनवाही
  • कोयलारी-63
  • मझगवां-18
  • बरही
  • देवगवांखुर्द

इन पर योजनाओं के तहत लाभार्थियों से जुड़ी सूचनाओं में लापरवाही और जमीनी कार्यों में निष्क्रियता के आरोप हैं।

जिन योजनाओं की समीक्षा हुई

समीक्षा बैठक में जिन प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की गई, वे इस प्रकार हैं:

  • जल गंगा संवर्धन अभियान: जल संरक्षण, स्रोत संवर्धन और नदियों के पुनरुद्धार की योजना।
  • सीएम हेल्पलाइन: जनशिकायतों की सुनवाई और समाधान में देरी।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण: मकानों की धीमी स्वीकृति और निर्माण में लापरवाही।
  • स्वच्छ भारत मिशन – ग्रामीण: शौचालय निर्माण और सफाई अभियानों में सुस्ती।

उमरिया जिला पंचायत प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ग्राम पंचायतों के स्तर पर जवाबदेही तय करने के लिए यह सख्त कदम आवश्यक था। आने वाले समय में अन्य जिलों में भी इसी तरह की कार्रवाई देखने को मिल सकती है। यह पूरी प्रक्रिया ग्रामीण विकास प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं परिणामकारक बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

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