
इंदौर के महाराजा तुकोजीराव हॉस्पिटल (MTH) में वर्ष 2023 में शुरू हुआ मध्यप्रदेश का पहला मदर मिल्क बैंक अब पूरे देश के लिए उदाहरण बन चुका है। इस पहल के तहत अब तक 1000 से अधिक नवजात शिशुओं को जीवनदान मिल चुका है। माताओं ने करीब 210 लीटर पोषणयुक्त दूध दान कर मानवता की नई मिसाल पेश की है।
कैसे आया मदर मिल्क बैंक का विचार
देश में नवजात शिशुओं की मृत्यु दर लगातार चिंता का विषय रही है, खासतौर पर तब जब बच्चों को जन्म के तुरंत बाद मां का दूध नहीं मिल पाता। इस संकट को दूर करने और जरूरतमंद शिशुओं तक स्तनपान का लाभ पहुंचाने के लिए इंदौर में मदर मिल्क बैंक की नींव रखी गई। इसका संचालन NHM और एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सहयोग से हुआ।
बच्चों को कैसे मिलता है मां का दूध
मदर मिल्क बैंक ब्लड बैंक की तरह ही कार्य करता है। जिन प्रसूताओं का दूध पर्याप्त मात्रा में आता है, उनसे सलाह और काउंसलिंग के बाद दूध लिया जाता है। उसे खास तापमान पर संरक्षित कर नवजातों तक पहुंचाया जाता है। यह दूध सिर्फ उन्हीं बच्चों को मिलता है जो MTH की नवजात देखभाल इकाई (SNCU) में भर्ती होते हैं।
1 हजार बच्चों को जीवनदान और 210 लीटर दूध
बीते दो वर्षों में करीब 15 हजार से ज्यादा प्रसूताओं की काउंसलिंग की गई, जिसमें से एक हजार से अधिक माताओं ने स्वेच्छा से दूध दान किया। इस प्रक्रिया में लगभग 210 लीटर दूध जमा हुआ, जिससे एक हजार से ज्यादा नवजातों को जीवन बचाया गया।
इन्फेक्शन और मृत्यु दर में आई भारी गिरावट
मदर मिल्क बैंक की स्थापना से पहले नवजातों में इन्फेक्शन और मृत्यु दर 22–25% के बीच थी। लेकिन अब यह घटकर 11% तक आ गई है। कई बार यह 10% से भी कम रही है। इसके साथ ही डिस्चार्ज रेट 85% तक पहुंच गया है, जो कि एक बड़ी उपलब्धि है।
माताओं की सोच में बदलाव
शुरुआती दौर में महिलाओं को दूध दान के लिए तैयार करना चुनौती था। कई माताएं इसे कमजोरी से जोड़ती थीं या सामाजिक भ्रम के कारण हिचकती थीं। लेकिन मदर मिल्क बैंक की टीम ने लगातार काउंसलिंग की और यह समझाया कि दूध दान से न तो बच्चा कमजोर होगा और न मां। धीरे-धीरे माताओं में जागरूकता आई और उन्होंने इसे सेवा के रूप में अपनाया।
अन्य राज्यों के नवजातों को भी मिला लाभ
MTH अस्पताल में करीब 150 बेड की सुविधा है और SNCU यूनिट में 60 शिशु बेड्स हैं। यहां न केवल इंदौर बल्कि भोपाल, मंदसौर, झाबुआ, आगर मालवा सहित मध्यप्रदेश के अन्य जिलों के साथ ही राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी प्रसूताएं आती हैं। इन क्षेत्रों के नवजातों को इस बैंक से लाभ मिला है।
डोनर माताओं के अनुभव
एक महिला ने बताया कि शुरू में उसे प्रोसेस की जानकारी नहीं थी, लेकिन जब उसे पता चला कि उसका दूध किसी अनाथ या बीमार बच्चे की जान बचा सकता है, तो उसने लगातार चार दिन दूध दान किया। उसे संतोष है कि उसकी थोड़ी सी कोशिश ने किसी मां की गोद भरी होगी। एक अन्य मामला मुंबई से आया, जहां एक महिला इंदौर आकर नियमित दूध डोनेट कर रही है।
प्रदेशभर में खुलेंगे और मिल्क बैंक
इंदौर का मदर मिल्क बैंक अब प्रदेश के बाकी सरकारी अस्पतालों के लिए मॉडल बन चुका है। NHM इसकी निरंतर मॉनिटरिंग कर रहा है और हाल ही में हुई बैठकों में निर्णय लिया गया है कि प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी ऐसे बैंक खोले जाएंगे। इसके लिए इंदौर का बैंक प्रशिक्षण और प्रबंधन का केंद्र बनेगा।




