दिसंबर 2024 में निर्भय नामक युवक ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन बदलते समय खो गया था। उसका इलाज आगरा में चल रहा था, जहां से लौटते वक्त पिता पानी लेने गए और निर्भय वहीं से गायब हो गया। जीआरपी थाने में रिपोर्ट दी गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
आश्रम में देखभाल
कुछ दिन बाद वह सड़क पर लावारिस हालत में मिला, जहां पुलिस ने उसे बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किया। मेडिकल परीक्षण में बालिग पाया गया और फरवरी 2025 में उसे स्वर्ग सदन आश्रम भेजा गया। आश्रम के संचालक विकास गोस्वामी की टीम ने उसकी काउंसलिंग की, पर वह अपने घर की जानकारी ठीक से नहीं बता पा रहा था।

सोशल मीडिया से बदल गई किस्मत
15 जून 2025 को DSP संतोष पटेल फादर्स डे पर स्वर्ग सदन आए। वहां निर्भय की भाषा और हावभाव देखकर उन्होंने एक रील बनाई। 27 जून को जैसे ही उन्होंने यह रील पोस्ट की, ढाई घंटे में 10 लाख लोगों ने देख डाला। वीडियो चित्रकूट के निर्भय के रिश्तेदारों तक पहुंचा और उन्होंने डीएसपी से संपर्क किया।
खुशी के आंसू
28 जून को निर्भय के माता-पिता और रिश्तेदार 400 किलोमीटर दूर चित्रकूट से ग्वालियर पहुंचे और उसे पहचानकर गले लगाया। परिवार ने आश्रम की प्रक्रिया पूरी की और निर्भय को लेकर वापस घर चले गए। मां-बाप से मिलकर निर्भय भी भावुक हो गया।
डीएसपी की संवेदनशीलता
डीएसपी संतोष पटेल, जो पहले ग्वालियर में पदस्थ थे और अब बालाघाट में तैनात हैं, कई बार सोशल मीडिया से ऐसे मामलों में मदद कर चुके हैं। उनकी पोस्ट ने इस बार भी एक परिवार को फिर से जोड़ा।

ऐसी कहानियां दिखाती हैं कि अगर पुलिस और समाज मिलकर कोशिश करें, तो कोई भी बिछड़ा व्यक्ति फिर से अपने घर लौट सकता है। सोशल मीडिया ने इस परिवार को नई उम्मीद दी, और निर्भय को सात महीने बाद अपने माता-पिता की गोद में लौटाया।




