भोपाल के छोला मंदिर थाना क्षेत्र में रविवार की रात खौफनाक शूटआउट हुआ जिसमें 22 वर्षीय अमित वर्मा की जान चली गई। जानकारी के मुताबिक अमित अपने दोस्तों के साथ आशू खटीक के जन्मदिन की पार्टी में शामिल था। पार्टी के बाद सभी लोग बाहर खड़े होकर बातचीत कर रहे थे, तभी नसीम बन्ने खां अपने छह साथियों के साथ दो बाइकों पर वहां आ धमका।

अचानक गाली-गलौज के बाद नसीम और उसके गिरोह ने करीब छह राउंड गोलियां चला दीं। अमित के सिर और पेट में गोली लगी और उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। हमलावर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद मोहल्ले में अफरा-तफरी मच गई और लोग दहशत में घरों में दुबक गए।
नसीम का निशाना कौन था?
पुलिस ने शुरुआती जांच में बताया कि नसीम का असली टारगेट राजा खटीक था, जो अमित के साथ खड़ा था। राजा से नसीम का पुराना लेन-देन का विवाद था और उसे खत्म करने के इरादे से हमला किया गया। लेकिन गोलियां निर्दोष अमित को लग गईं।
परिवार का दर्द
मृतक के भाई अतुल वर्मा ने बताया कि अमित पूरी तरह सीधा-साधा युवक था, जिसने कभी किसी से दुश्मनी नहीं की। वह अपने दोस्त के बुलावे पर पार्टी में गया था, लेकिन गैंगवार का शिकार बन गया।
आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड
नसीम बन्ने खां पहले भी कई सनसनीखेज वारदातों को अंजाम दे चुका है। वह शाजापुर जिले का निवासी है लेकिन लंबे समय से भोपाल में रहकर अपराध कर रहा है। उसके खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, डकैती, लूट और रंगदारी समेत 46 मुकदमे दर्ज हैं। दिसंबर 2023 में भी उसने बुधवारा क्षेत्र में नवाज रियाज नामक कारोबारी को टेंट हाउस में घुसकर गोली मार दी थी और उसके साथियों ने तलवार से हमला किया था।

हमले से पहले नसीम ने कारोबारी को धमकी भरा ऑडियो भेजकर 10 लाख रुपये मांगे थे और खुद को लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का शूटर बताया था। रकम नहीं देने पर गोली मार दी गई। इस केस में पुलिस ने बाद में उसे शॉर्ट एनकाउंटर के बाद पकड़ा था, जिसमें उसके पैर में गोली लगी थी।
जांच और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने इस ताजा वारदात के बाद नसीम, वसीम और अन्य संदिग्धों पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापे मारे जा रहे हैं। छोला मंदिर थाने के प्रभारी सुरेश चंद्र नागर ने कहा कि बदमाशों के हौसले तोड़ने के लिए कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल में इस प्रकार खुलेआम फायरिंग से आम लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस और प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है कि गैंगस्टर मानसिकता के बदमाशों को कैसे रोका जाए ताकि भोपाल जैसे शहर में लोग बेखौफ जी सकें।




