भोपाल में मोहर्रम के दौरान खामेनेई के पोस्टर: ईरानी डेरे में क्यों लगाए गए?

भोपाल के रेलवे स्टेशन के पास स्थित ईरानी डेरे में मोहर्रम के मौके पर इस साल खास नजारा देखने को मिला, जहां कई ईरानी धार्मिक और सैन्य नेताओं के पोस्टर लगाए गए। इनमें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई, कासिम सुलेमानी, अली अल सिस्तानी और खोमैनी शामिल हैं। आयोजकों का कहना है कि यह कोई जश्न नहीं बल्कि एक वैचारिक संदेश है।

ईरानी नेताओं के पोस्टर का कारण

इमाम शाहकार हुसैन ने बताया कि मोहर्रम में हर साल पोस्टर लगते हैं, लेकिन इस बार इजराइल और ईरान के बीच हुए ताजा संघर्ष के कारण इन पोस्टरों की संख्या बढ़ाई गई। उनका कहना था कि ईरान ने जिस तरह से जवाब दिया, उसने पूरी दुनिया में इंसाफपसंद लोगों को हौसला दिया है।

तिरंगे के साथ पोस्टर

ईरानी डेरे में जो पोस्टर लगाए गए, उनके ऊपर भारतीय तिरंगा भी लगाया गया। आयोजकों के मुताबिक, यह दिखाने के लिए है कि वे पूरी तरह भारतीय हैं और किसी विरोधाभास की गुंजाइश नहीं है। यह संदेश है कि इंसाफ की लड़ाई में भारतीय मुसलमान भी पीछे नहीं रहते।

ईरानी इमाम का नजरिया

इमाम शाहकार हुसैन ने कहा कि मोहर्रम हमें अन्याय के खिलाफ खड़े रहने की प्रेरणा देता है। खामेनेई ने भी अपने भाषण में इसे मोहर्रम की जीत बताया। उनका मानना है कि दुनिया को दिखाना जरूरी था कि जुल्म करने वाले कभी जीतते नहीं। यही वजह है कि बैनरों में महात्मा गांधी का भी संदेश जोड़ा गया, जिसमें मोहर्रम को आतंकवाद के खिलाफ एक विरोध बताया गया।

भारत की भूमिका और समर्थन

ईरानी कल्चरल हाउस ने भारत के तटस्थ रुख की सराहना की और इसके लिए भारत की जनता का आभार जताया। उनका कहना था कि भारत ने संघर्ष में शांति की पहल की और संघर्ष विराम का समर्थन किया। इससे ईरान के लोग भारत को लेकर और सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं।

यूरोप के रुख पर टिप्पणी

इमाम ने यूरोपीय देशों की आलोचना भी की, जिनके रुख को उन्होंने पक्षपाती बताया और कहा कि भारत की तरह संतुलित रुख कहीं और नहीं दिखा।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

स्थानीय युवक करार अली और तौफिक अली ने कहा कि मोहर्रम के इस प्रतीकात्मक आयोजन ने यह जता दिया कि मजलूमों की आवाज आज भी दबाई नहीं जा सकती। उन्होंने कहा कि खामेनेई और अन्य ईरानी नेताओं के पोस्टरों का मकसद नई पीढ़ी को याद दिलाना है कि इंसाफ की राह पर चलने वालों को अंत में जीत मिलती ही है।

कुल मिलाकर भोपाल में लगे इन पोस्टरों ने बहस तो जरूर छेड़ी, लेकिन आयोजकों का कहना है कि यह शांति और विचारधारा का प्रतीक है, कोई राजनीतिक प्रदर्शन नहीं।

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