ग्वालियर स्ट्रीट डॉग बाइट की घटनाएं शहर में डर का माहौल बना रही हैं। पिछले 6 महीने में 4500 से ज्यादा लोग डॉग बाइट का शिकार हुए हैं, जिनमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं। ताजा मामला कंपू क्षेत्र के अबडापुरा का है, जहां एक 5 वर्षीय बच्ची पर स्ट्रीट डॉग ने हमला कर दिया। बच्ची घर के बाहर खेल रही थी, तभी कुत्ते ने उसके पैर को अपने जबड़े में दबा लिया और खींचने लगा। लोगों ने शोर सुनकर बच्ची को बचाया, लेकिन उसके पैर में गहरे जख्म बन गए।
6 महीने में 4500 लोगों को एंटी रैबीज
JAH की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2025 तक 4500 लोगों को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए गए हैं। पिछले 10 दिन में ही 350 लोग अस्पताल पहुंचे हैं। अगर नगर निगम की डिस्पेंसरियों और सिविल अस्पतालों के आंकड़े जोड़ें तो यह संख्या और बढ़ जाएगी। ग्वालियर में स्ट्रीट डॉग बाइट अब गंभीर समस्या बन चुकी है।
बच्ची की हालत स्थिर

घायल बच्ची को तुरंत जयारोग्य अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने आधा दर्जन टांके लगाए। इलाज के बाद उसे पीडियाट्रिक सर्जरी वार्ड में शिफ्ट किया गया और अब वह स्थिर है।
स्ट्रीट डॉग बाइट से बचने के उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार डॉग बाइट के तुरंत बाद इन बातों का पालन करें:
- घाव को तुरंत साबुन और पानी से धोएं।
- एंटीसेप्टिक लगाएं।
- देसी इलाज से बचें, क्योंकि संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
- तुरंत अस्पताल जाकर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाएं।
CDC के अनुसार भी समय पर टीका लगवाना जरूरी है।
प्रशासन का रवैया
ग्वालियर नगर निगम ने नसबंदी अभियान शुरू किया था, लेकिन उसकी रफ्तार बहुत धीमी है। कई इलाकों में स्ट्रीट डॉग तेजी से बढ़ रहे हैं और लोगों पर हमला कर रहे हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार नगर निगम को तकनीक का सहारा लेना चाहिए और लोगों को भी शिक्षित करना चाहिए।
जनता की जिम्मेदारी
लोगों को चाहिए कि कुत्तों को खाना डालने के बाद उनकी हरकतों पर नजर रखें, ताकि वे आक्रामक न बनें। एनजीओ और पशुप्रेमियों को भी मिलकर समाधान की दिशा में काम करना होगा।
ग्वालियर स्ट्रीट डॉग बाइट की घटनाओं में कमी लाने के लिए प्रशासन और आम लोग, दोनों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। बच्चों को अकेला बाहर खेलने न भेजें और सतर्कता बनाए रखें।




