मंदसौर दुष्कर्मियों को फांसी की मांग को लेकर शुक्रवार को पूरे शहर में जनाक्रोश फूट पड़ा। 7 वर्षीय मासूम से दरिंदगी करने वाले दोषियों की सजा उम्रकैद में बदलने के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे और मौन रैली निकाली।

26 जून 2018 को मंदसौर में एक बच्ची के साथ गैंगरेप की घटना हुई थी, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। पहले सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट ने दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन तकनीकी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने केस वापस ट्रायल कोर्ट को भेजा। 30 जून को ट्रायल कोर्ट ने फांसी को उम्रकैद में बदल दिया, जिससे लोगों में गहरा आक्रोश है।
मौन रैली में उमड़ा जनसैलाब
शुक्रवार दोपहर 3 बजे आजाद चौक से शुरू हुई रैली घंटाघर, नेहरू बस स्टैंड और गांधी चौराहा होते हुए पुलिस कंट्रोल रूम पहुंची। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मांग की कि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगाकर फिर से फांसी का आदेश कराया जाए।
लोगों का कहना है कि उम्रकैद से समाज में गलत संदेश जाएगा और भविष्य में ऐसे अपराधियों का हौसला बढ़ेगा। इसलिए फांसी की सजा ही उचित है।
व्यापारियों और युवाओं का सहयोग
इस विरोध में करीब 1500 लोगों ने हिस्सा लिया। बाजार बंद रहा और कई व्यापारिक संगठनों ने भी समर्थन किया। महिलाओं और युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी दिखाई।
प्रशासन का रुख
एसडीएम शिवलाल शाक्य ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की मांगों को उचित मंच तक पहुंचाया जाएगा और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
दोषियों को फांसी क्यों जरूरी?
पीड़ित परिवार और आम नागरिकों का तर्क है कि इतनी घिनौनी हरकत करने वालों को उम्रकैद से नहीं, बल्कि फांसी से दंडित किया जाए। इससे समाज में कड़ा संदेश जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।
न्याय की उम्मीद कायम
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकीलों से मजबूत पैरवी कराई जाए, ताकि दोषियों की फांसी सजा फिर बहाल की जा सके।


मंदसौर दुष्कर्मियों को फांसी की मांग को लेकर लोगों की आवाज लगातार बुलंद हो रही है। न्याय तभी मिलेगा जब सख्त कानून और सख्त सजा लागू होगी।




