इंदौर आरटीओ ने पुराने बकायादारों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए 20 हजार वाहनों से 400 करोड़ रुपए की टैक्स और जुर्माने की वसूली शुरू कर दी है। यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की जा रही है, जिसमें फोन कॉल से लेकर वाहन जब्ती और नीलामी तक की योजना शामिल है।
- बड़े लक्ष्य की चुनौती
- वसूली की प्रक्रिया
- डेटा की समस्या और जटिलता
- क्या सब वसूल हो पाएगा?
- प्रणाली को नए मोड़ की जरूरत
बड़े लक्ष्य की चुनौती
वित्तीय वर्ष 2025 के लिए इंदौर आरटीओ को 1150 करोड़ रुपए की वसूली करनी है। पिछले दो वर्षों से वसूली का आंकड़ा लक्ष्य से पीछे रहा, जिससे इस बार विभाग ने पुराने मामलों की ओर ध्यान देना शुरू किया है।
वसूली की प्रक्रिया
20 हजार वाहनों की पहचान की गई है जिनसे राशि वसूली जानी है। इन वाहनों के मालिकों से संपर्क करने के लिए कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई है। फोन कॉल, नोटिस और क्षेत्रीय दौरे शुरू कर दिए गए हैं। टैक्स जमा न करने वालों के वाहन जब्त और बाद में नीलाम किए जाएंगे।
डेटा की समस्या और जटिलता
40-50 साल पुराने वाहनों का डेटा अब तक अपडेट नहीं हुआ है। जिनमें से कई वाहन अब मौजूद ही नहीं हैं, लेकिन उनका रिकॉर्ड सिस्टम में बना हुआ है। इसके चलते वसूली में बाधा आ रही है और स्टाफ को भी अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है।
क्या सब वसूल हो पाएगा?
सूत्रों की मानें तो जिन वाहनों की जानकारी अधूरी है या जो सालों पहले स्क्रैप हो चुके हैं, उनसे वसूली संभव नहीं है। इसलिए विभाग ने हाल के वर्षों के बकायादारों को प्राथमिकता दी है।
प्रणाली को नए मोड़ की जरूरत
डेटा के केंद्रीकरण के बाद भी कई गड़बड़ियां हैं। पुरानी फाइलों की सफाई और सिस्टम अपडेट एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अब समय आ गया है जब राज्य परिवहन विभाग को अपने डेटाबेस और प्रक्रिया दोनों में आधुनिकता लानी चाहिए।
यह अभियान विभाग के लिए सिर्फ वसूली नहीं बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता और जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। यदि डेटा क्लीनअप और चरणबद्ध वसूली साथ-साथ चले तो यह मुहिम सफल हो सकती है। लेकिन इसके लिए प्रशासनिक इच्छा और तकनीकी संसाधनों की पर्याप्तता आवश्यक होगी।




