इंदौर के द्वारकापुरी क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब 21 वर्षीय छात्रा पलक पाठक ने परीक्षा से कुछ घंटे पहले फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। छात्रा BA कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रही थी और हाल ही में उसके कुछ पेपर खराब हुए थे, जिससे वह मानसिक दबाव में बताई जा रही थी।
- इंदौर के श्रद्धा सबूरी कॉलोनी की रहने वाली थी पलक
- शुक्रवार सुबह कमरे में फांसी पर लटका मिला शव
- पुलिस और एफएसएल टीम ने की जांच, सुसाइड नोट नहीं मिला
- पिता ने परीक्षा से पहले बेटी को उठाने की कोशिश की थी
अनुक्रम
- घटना का विवरण
- तनाव की आशंका और पढ़ाई का दबाव
- परिवार का बयान
- पुलिस की जांच और अगला कदम
- मानसिक स्वास्थ्य पर चिंता
घटना का विवरण
शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे पलक के पिता शैलेंद्र पाठक ने पुलिस को सूचना दी कि उनकी बेटी ने कमरे में फांसी लगा ली है। शैलेंद्र जब अपने छोटे बेटे और बेटी को कॉलेज छोड़कर लौटे, तो उन्होंने पलक को जगाने के लिए आवाज दी। जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो उन्होंने दरवाजा तोड़कर देखा कि पलक पंखे से लटकी हुई है।
सूचना मिलते ही द्वारकापुरी थाना पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन कमरे को सील कर दिया गया है।
तनाव की आशंका और पढ़ाई का दबाव
पुलिस जांच में सामने आया कि पलक के हाल ही में दो पेपर खराब हुए थे। परिवार वालों के अनुसार, वह कुछ समय से तनाव में रह रही थी। पिता ने उसे समझाया था कि वह परीक्षा की तैयारी पर ध्यान दे, लेकिन संभवतः वह मानसिक दबाव नहीं झेल सकी।
पिता के मुताबिक, परीक्षा के खराब प्रदर्शन को लेकर पलक बेहद चिंतित थी। गुरुवार रात करीब 11 बजे परिवार ने साथ में भोजन किया था, उस समय पलक सामान्य दिख रही थी। लेकिन सुबह यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घट गई।
परिवार का बयान
पलक के पिता शैलेंद्र पाठक पेशे से पुजारी हैं। उन्होंने बताया कि पलक उनकी सबसे बड़ी बेटी थी। उनके अनुसार, “सुबह जब मैं छोटे बच्चों को कॉलेज छोड़कर आया और पलक को जगाने गया, तब वह जवाब नहीं दे रही थी। ऊपर जाकर देखा तो दरवाजा बंद था, खटखटाने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। जब दरवाजा तोड़ा, तो वह फांसी पर लटकी मिली।”
पुलिस की जांच और अगला कदम
द्वारकापुरी थाना प्रभारी सुशील पटेल ने बताया कि मामले की मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस पलक के दोस्तों और कॉलेज के स्टाफ से भी पूछताछ कर रही है। मकसद यह जानना है कि क्या कोई और वजह थी जिससे छात्रा परेशान थी।
एफएसएल टीम ने कमरे की जांच कर जरूरी सबूत इकट्ठा किए हैं। पलक का मोबाइल फोन और अन्य निजी सामान भी जब्त किया गया है ताकि किसी संभावित डिजिटल सुराग से आत्महत्या के पीछे की वजह पता चल सके।
मानसिक स्वास्थ्य पर चिंता
इस घटना ने एक बार फिर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा का दबाव, समाज की अपेक्षाएं और आत्म-विश्वास की कमी अक्सर युवाओं को असहाय महसूस कराते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर परामर्श और भावनात्मक समर्थन छात्रों को ऐसे कदम उठाने से रोक सकते हैं।
स्थानीय मनोचिकित्सक डॉ. अंशुल जैन का कहना है, “छात्रों को अपनी असफलताओं को स्वीकार करना सिखाया जाना चाहिए। परीक्षा जीवन का एक हिस्सा है, न कि अंत।”
समाप्ति विचार
इंदौर की यह घटना समाज को एक चेतावनी है कि हमें अपने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की ओर और अधिक गंभीरता से ध्यान देना होगा। पलक पाठक की आत्महत्या केवल एक घटना नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली, अभिभावक दबाव और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच फंसे युवाओं की कहानी है।





