- बिल्लियों, चूहों, बंदरों द्वारा काटे जाने के भी सैकड़ों मामले सामने आए
- सर्पदंश और अन्य पशुओं के हमलों की घटनाएं भी दर्ज
इन हमलों ने शहर में जनस्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है।
इंदौर में कुत्तों के काटने की घटनाएं बनीं जनस्वास्थ्य का संकट

डॉग बाइट्स का खतरनाक ग्राफ
हुकुमचंद लाल अस्पताल में जनवरी से जून 2025 तक 23,695 लोगों ने डॉग बाइट के लिए इलाज कराया। यह संख्या बताती है कि हर दिन औसतन 130 लोग इस संकट से प्रभावित हो रहे हैं।
ठंड और बारिश में अलग-अलग ट्रेंड
ठंड के मौसम में कुत्तों के हमले बढ़ जाते हैं। जून के मुकाबले जनवरी में 1000 से ज्यादा ज्यादा केस आए। वहीं बारिश में बिल्लियों और चूहों के हमले बढ़ जाते हैं।
अन्य जानवरों का भी हमला
918 बिल्ली बाइट, 345 चूहा बाइट और 216 बंदर बाइट केस दर्ज हुए। साथ ही, 32 अन्य पशुओं के काटने की घटनाएं भी जून में सामने आईं।
सांप काटने के मामलों ने भी डराया
राज्य स्तर पर 4205 लोग सर्पदंश के शिकार हुए। इंदौर में भले ही अस्पताल में कम लोग पहुंचे, लेकिन 40 से ज्यादा मामले दर्ज हुए, जिसमें एंबुलेंस स्टाफ ने समय रहते कार्रवाई की।
पशु नियंत्रण और प्रशासनिक लापरवाही
नगर निगम द्वारा पशु नियंत्रण की पर्याप्त कार्रवाई न किए जाने से हालात बदतर हो गए हैं। नसबंदी अभियान, कचरा नियंत्रण और ट्रेंनिंग की कमी इन घटनाओं का प्रमुख कारण हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियां
डॉग बाइट के हर केस में रैबीज का खतरा रहता है। अस्पतालों पर भार बढ़ता जा रहा है। निजी अस्पतालों में भी कई पीड़ित इलाज करा रहे हैं।
जनजागरूकता ही समाधान
लोगों को जानवरों से दूरी बनाकर रहना, काटे जाने की स्थिति में तुरंत इलाज कराना और बच्चों को सतर्क रखना बेहद जरूरी है।
प्रभावी कदमों की ज़रूरत
यदि अब भी जिम्मेदार विभाग जागरूक नहीं हुए, तो यह स्वास्थ्य संकट और भी गंभीर रूप ले सकता है।
सावधानी के सुझाव
- कचरा खुले में न फेंकें
- जानवरों को छेड़ने से बचें
- टीकाकरण की जानकारी अपने पास रखें
पढ़ें: जानवरों के काटने पर क्या करें?
इस रिपोर्ट से स्पष्ट है कि इंदौर में पशु हमलों को नियंत्रित करना अब प्राथमिकता बन चुका है।




