AIIMS भोपाल ब्रेन डेड पोस्टमॉर्टम को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है। पहली बार ऑपरेशन थिएटर के भीतर पोस्टमॉर्टम कर यह दिखाया गया कि मेडिकल व्यवस्थाएं संवेदनशीलता और दक्षता के साथ कैसे कार्य कर सकती हैं।
औबेदुल्लागंज निवासी शंकर लाल कुबरे के दिल और दोनों किडनियां जरूरतमंद मरीजों को दान की गईं। ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद, जैसे ही अंगों की हार्वेस्टिंग हुई, उसी ऑपरेशन थिएटर में फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने तुरंत पोस्टमॉर्टम भी कर दिया।

AIIMS भोपाल ब्रेन डेड पोस्टमॉर्टम को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली टीम का नेतृत्व प्रो. डॉ. राघवेंद्र कुमार विदुआ ने किया। इस अनोखे कदम से न केवल समय की बचत हुई, बल्कि मृतक के परिवार की भावनाओं का भी सम्मान हुआ।
AIIMS भोपाल में अब तक 11 किडनी ट्रांसप्लांट और 2 हार्ट ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। आने वाले समय में बच्चों के किडनी ट्रांसप्लांट पर भी काम हो रहा है।
NOTTO की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 2023 में देश में 1,099 कैडेवर डोनेशन हुए, जिनमें मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी केवल 8 रही। यह आँकड़ा बताता है कि राज्य में अंगदान के प्रति जागरूकता की भारी कमी है।
AIIMS भोपाल ब्रेन डेड पोस्टमॉर्टम की यह पहल न सिर्फ एक चिकित्सा उपलब्धि है, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति सोच बदलने वाला कदम भी है।




