
रतलाम जिले की आलोट जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गुलबालोद में तैनात सचिव अर्जुनसिंह पंवार को ई-केवाईसी कैंप में लापरवाही बरतने के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शृंगार श्रीवास्तव द्वारा यह कार्रवाई की गई है।
23 जुलाई को तय था कैंप, लेकिन सचिव नहीं पहुंचे
23 जुलाई 2025 को गांव में ई-केवाईसी शिविर का आयोजन किया गया था, जिसमें ग्रामीणों का डिजिटल सत्यापन होना था। इसके लिए सचिव को कैंप की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन तय दिन सचिव पंचायत भवन में नहीं पहुंचे और फोन कॉल्स का भी कोई जवाब नहीं दिया। ग्रामीणों ने पंचायत भवन बंद पाया।
एक दिन में शून्य काम, अगले दिन केवल 5 केवाईसी
ई-केवाईसी कैंप के प्रदर्शन की रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज होती है। रिकॉर्ड के अनुसार, 23 जुलाई को कोई भी केवाईसी नहीं हुआ और 24 जुलाई को सिर्फ 5 लोगों का ही ई-केवाईसी हुआ। इतनी कम प्रगति को देखते हुए संबंधित विभाग ने सचिव को कारण बताओ नोटिस
सीईओ ने गंभीरता से लिया मामला
जिला पंचायत सीईओ शृंगार श्रीवास्तव ने इसे वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और सरकारी कार्य में लापरवाही माना। मध्यप्रदेश पंचायत सेवा अनुशासन एवं अपील नियम 1999 के तहत सचिव अर्जुनसिंह पंवार को तत्काल निलंबित कर दिया गया है।
क्या होता है ई-केवाईसी कैंप?
ई-केवाईसी कैंप्स का मकसद है कि ग्रामीण जनता का आधार सत्यापन करके उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए। बायोमेट्रिक मशीनों के ज़रिए यह प्रक्रिया होती है और इसका डाटा राज्य पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। ऐसे कैंप्स में अधिकारी की अनुपस्थिति से काम बाधित होता है।
गांववालों की प्रतिक्रिया: “पहले भी गैरहाजिर रहे हैं सचिव”
गुलबालोद गांव के कुछ लोगों ने बताया कि सचिव कई बार बिना बताए अनुपस्थित रहते हैं। न पंचायत भवन समय पर खुलता है, न कोई समाधान जल्दी मिलता है। उनका कहना है कि निलंबन सही कदम है जिससे अब बाकी अधिकारी भी सावधान होंगे।
नियम क्या कहते हैं?
पंचायत सेवा नियमों के मुताबिक, अगर कोई कर्मचारी कर्तव्यों में लापरवाही करता है या अफसरों के निर्देश नहीं मानता, तो उसे नोटिस, वेतन रोक या निलंबन जैसी कार्रवाई झेलनी पड़ती है। विभागीय जांच के बाद आगे का फैसला लिया जाता है।
निलंबन के बाद आगे क्या?
निलंबन के बाद सचिव को वेतन नहीं मिलेगा और उन्हें विभागीय जांच का सामना करना होगा। अगर जांच में दोष साबित हुआ, तो सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है। इस बीच, ग्राम पंचायत के कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए किसी वैकल्पिक सचिव की अस्थायी नियुक्ति की जा सकती है।
पहले भी हुई हैं ऐसी कार्यवाहियां
रतलाम जिले में यह पहला मामला नहीं है। पिछले वर्ष भी एक पंचायत सचिव को प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति शून्य रहने पर सस्पेंड किया गया था। साफ है कि अब प्रशासन लापरवाह कर्मचारियों पर ढिलाई नहीं दिखा रहा है।
पंचायत अधिकारी का बयान
जिपं सीईओ शृंगार श्रीवास्तव ने कहा, “ई-केवाईसी कैंप में पंचायत सचिव की जिम्मेदारी होती है कि वह समय पर मौजूद रहे और अधिक से अधिक लाभार्थियों का सत्यापन करवाए। ऐसी लापरवाही अस्वीकार्य है।”
ई-केवाईसी में देरी से प्रभावित होती हैं योजनाएं
ई-केवाईसी अपडेट न होने से कई ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धावस्था पेंशन, उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में कैंप का समय पर और जिम्मेदारी से होना बेहद जरूरी है।
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निष्कर्ष: गुलबालोद पंचायत सचिव का निलंबन प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है। सरकारी योजनाओं की सफलता में पंचायत सचिव की भूमिका अहम होती है और इसमें लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।




