
रतलाम की एक महिला पटवारी को 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 4 साल की सजा सुना दी है। आरोपी का नाम रचना गुप्ता (पूर्व नाम रचना शर्मा) है। उन्हें सजा के साथ 2000 रुपये का जुर्माना भी भरना होगा।
किस बात पर मांगी थी रिश्वत?
यह मामला 2021 में सामने आया था जब एक किसान गोपाल सिंह गुर्जर ने लोकायुक्त उज्जैन कार्यालय में शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने कोर्ट से अपनी 6 बीघा जमीन का नामांतरण करवाया था। इसके बाद पटवारी रचना गुप्ता ने पावती बनाने के बदले उनसे 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी।
लोकायुक्त टीम ने कैसे पकड़ा?
शिकायत के बाद लोकायुक्त टीम ने पहले मामले की जांच की। गोपाल सिंह को वॉयस रिकॉर्डर दिया गया, जिससे वह रचना गुप्ता की बातचीत रिकॉर्ड कर सकें। रिकॉर्डिंग में साफ सुना गया कि रचना गुप्ता ने रिश्वत लेने की बात मानी और आधे पैसे (5 हजार रुपये) पहले लेने को तैयार हुईं।
इसके बाद 12 जुलाई 2021 को लोकायुक्त टीम ने टेलीफोन नगर स्थित उनके घर पर छापा मारा। वहां रचना को गोपाल से 5 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। ये रुपये उनके घर के बरामदे में रखी पलंग पेटी में मिले।
सबूत कैसे पुख्ता हुए?
लोकायुक्त ने जो नोट गोपाल सिंह को दिए थे, उन पर पहले से ही केमिकल (फिनाफ्थलीन पाउडर) लगाया गया था। जब रचना गुप्ता ने उन्हें छुआ, तो उनके हाथों पर केमिकल के निशान मिल गए। इसके अलावा रिकॉर्डिंग भी मजबूत सबूत बनी।
कोर्ट में क्या हुआ?
मामले की जांच पूरी होने के बाद 24 अगस्त 2023 को लोकायुक्त पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई विशेष न्यायाधीश संजीव कटारे की अदालत में हुई। सरकारी वकील कृष्णकांत चौहान ने पूरे मामले की प्रभावी पैरवी की। सबूतों को देखते हुए कोर्ट ने रचना को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत दोषी माना और उन्हें 4 साल की सजा सुनाई।
इस फैसले के बाद पटवारी रचना गुप्ता को जेल भेज दिया गया है। कोर्ट का यह निर्णय प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
इस मामले से साफ होता है कि सरकारी कर्मचारी यदि कानून के खिलाफ जाते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई जरूर होती है। आम लोग भी सतर्क रहें और अगर कोई रिश्वत मांगता है तो उसकी शिकायत जरूर करें। अब न्याय प्रणाली भी सजग है और दोषियों को सजा देने में पीछे नहीं है।




