
उज्जैन-देवास हाईवे के नागझिरी-दताना हिस्से का फोरलेन निर्माण पिछले एक साल से लटका हुआ है। जबकि मार्च 2024 में ही केंद्र सरकार ने 38 करोड़ रुपए जारी कर दिए थे। सवाल यह है कि राशि जारी होने के बाद भी सड़क निर्माण इतना धीमा क्यों है?
क्या है मामला?
उज्जैन शहरी सीमा में आने वाला यह 8.8 किमी का क्षेत्र ट्रैफिक की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने शेष 42 किमी सड़क को फोरलेन में बदल दिया, लेकिन शहरी सीमा का यह हिस्सा लोनिवि के हवाले कर दिया गया।
लोनिवि के तर्क और जमीनी सच्चाई
विभाग का दावा है कि बारिश के कारण डामरीकरण रुका है, पर क्षेत्र में अधूरे गड्ढे, बेसमेंट, कच्ची सड़क और जाम की स्थिति से यह साफ है कि काम की गति काफी धीमी है।
जनता का आक्रोश
स्थानीय लोगों और कॉलोनीवासियों का कहना है कि स्कूल-कॉलेज और ऑफिस जाने वाले रोजाना इस अधूरे निर्माण से प्रभावित हो रहे हैं। दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है और सरकारी वादे खोखले साबित हो रहे हैं।
केंद्र और राज्य की जिम्मेदारी
यह मामला राज्य व केंद्र दोनों के समन्वय का उदाहरण बन सकता था, लेकिन इस देरी ने सरकारी प्रणाली की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या हो आगे की दिशा?
साफ है कि अब फोरलेन कार्य को प्राथमिकता देनी होगी। विभागीय जवाबदेही तय करनी होगी ताकि आने वाले समय में मध्यप्रदेश के अन्य सड़क प्रोजेक्ट्स समय से पूरे हो सकें।
निष्कर्ष
38 करोड़ की राशि एक साल पहले मिलना और फिर भी सड़क अधूरी रहना, यह प्रशासनिक असफलता की मिसाल है। उज्जैन जैसे धार्मिक और पर्यटन नगर में ऐसी लापरवाही जनता को निराश करती है।




