
भोपाल। मालेगांव ब्लास्ट केस में पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें मानसिक और शारीरिक यातनाएं दी गईं ताकि वे प्रधानमंत्री मोदी, योगी आदित्यनाथ और अन्य नेताओं के नाम लें।
जांच एजेंसियों ने बनाया था दबाव?
मुंबई में मीडिया से बात करते हुए प्रज्ञा ने कहा कि जांच अधिकारी चाहते थे कि वे मोदी और RSS प्रमुखों का नाम लेकर उन्हें ब्लास्ट से जोड़ें। ऐसा करने पर उन्हें राहत का वादा किया गया था।
अस्पताल में गैरकानूनी हिरासत का दावा
साध्वी ने बताया कि उन्हें जबरन अस्पताल में हिरासत में रखा गया। अत्यधिक टॉर्चर के कारण उनकी फेफड़ों की स्थिति खराब हो गई।
एनआईए कोर्ट से राहत
31 जुलाई 2025 को NIA की स्पेशल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सातों आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में विफल रहा।
2008 का विस्फोट और संदिग्ध मंशा
29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक मस्जिद के पास धमाका हुआ था, जिसमें छह लोगों की जान गई और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। मामले में कुल 14 गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन मुकदमा केवल सात पर चला।
क्या जांच एजेंसियों पर उठेंगे सवाल?
साध्वी के बयान ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि “कई अधिकारियों ने कानून की आड़ में अनैतिक दबाव बनाया।”
विरोधियों ने उठाए एजेंसी दुरुपयोग के सवाल
विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित हो सकता है। वहीं समर्थक इसे साध्वी की सहनशक्ति और सच्चाई की जीत बता रहे हैं।




