ग्वालियर शहर में अपराध की नई रणनीति ने पुलिस प्रशासन को भी चौंका दिया है। अब अपराधी सीधे वार नहीं कर रहे, बल्कि खुद को या अपने परिचितों को जानबूझकर चोटिल कर झूठे केस बनवा रहे हैं। मकसद सिर्फ एक—अपने विरोधियों को फंसाना।
ऐसे मामलों में पुलिस ने पिछले कुछ सप्ताहों में बड़ी संख्या में षड्यंत्रों का खुलासा किया है, जिसमें 19 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
टीवी से मिली प्रेरणा, बनाया साजिशों का प्लान
जांच में सामने आया है कि कई लोग टीवी धारावाहिक और वेब सीरीज देखकर इस तरह के षड्यंत्र रचते हैं। पूरी योजना ऐसे बनाई जाती है कि FIR, मेडिकल रिपोर्ट और गवाह—सब कुछ पहले से तय होता है।
SSP का रुख सख्त
एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि अब झूठे केस रचने वालों को गंभीर धाराओं में आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया जा रहा है। पहले ऐसे मामलों में आरोपी सजा से बच जाते थे।
फर्जी केसों की प्रमुख घटनाएं
1. 4 लाख की डील में गोली खाकर दुश्मनों पर FIR
बृजेश परिहार पर गोली लगने की खबर आई, लेकिन जांच में पाया गया कि उसे 4 लाख रुपए में गोली लगवाई गई थी। इस मामले में 5 लोग गिरफ्तार हुए।
2. प्रॉपर्टी डीलर का नकली हमला
बंटी कुशवाह ने खुद पर गोली चलवाई और विरोधियों पर आरोप लगाया, पर सच सामने आते ही उसे और उसके तीन साथियों को जेल भेजा गया।
3. हजीरा और महाराजपुरा के प्रकरण
यहां भी झूठे गोलीकांडों की रिपोर्टें मिलीं। कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया जिनमें अधिकांश ने खुद को घायल कर मामला दर्ज कराया था।
4. कार खुद तोड़ी, लूट की कहानी बनाई
अखिलेश पाल ने कार में तोड़फोड़ कर 12 लाख की लूट का फर्जी केस दर्ज कराया। असलियत में वह कर्ज से परेशान था।
5. बीमा के लिए दोस्त से कार चोरी करवाई
शिवकुमार शर्मा ने खुद की गाड़ी चोरी कराने की योजना बनाई ताकि बीमा क्लेम मिल सके। योजना का भंडाफोड़ हुआ और केस फर्जी निकला।
6. महिला ने गहने छिपाकर लूट का झूठा केस बनाया
शिवपुरी रोड पर महिला ने बाइक सवार युवकों पर लूट का आरोप लगाया, लेकिन गहने उसी के पर्स में मिले। कारण—पुराना लेनदेन विवाद।
पूर्व पुलिस अधिकारी की चेतावनी
शैलेंद्र पांडे (सेवानिवृत्त एएसपी): “झूठे केसों का यह चलन खतरनाक है। जब सजा नहीं होती थी तब लोग इसे आसान उपाय समझते थे। अब समय आ गया है कि ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।”




