भोपाल, 5 अगस्त: मध्यप्रदेश में इस वर्ष मानसून ने रिकॉर्ड स्तर पर वर्षा की है। अब तक राज्य में औसतन 28.6 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो कि सामान्य 19.5 इंच की तुलना में 47% अधिक है। प्रदेश में वर्षा का औसत कोटा 37 इंच निर्धारित है, जिसमें से 77% बारिश अगस्त की शुरुआत तक पूरी हो चुकी है।
राज्य के कुछ हिस्सों में यह असमान रूप से वितरित हुई है। पूर्वी जिलों में जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई, वहीं पश्चिमी जिलों में अपेक्षाकृत कम वर्षा देखने को मिली।
इन जिलों में हुई सर्वाधिक वर्षा
मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
- गुना: 45.8 इंच
- निवाड़ी: 45.1 इंच
- मंडला, टीकमगढ़: 44 इंच
- अशोकनगर: 42 इंच
इसके विपरीत, इंदौर (11 इंच), बुरहानपुर (11.1), बड़वानी (11.5), खरगोन (11.8), और खंडवा (12.8) में सबसे कम बारिश दर्ज की गई है।
बाढ़ से जनहानि और क्षति
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार जून-जुलाई के दो महीनों में बारिशजनित घटनाओं के कारण राज्य में 275 लोगों की मृत्यु हुई है। साथ ही 1657 मवेशियों की भी जान गई।
सड़क एवं भवन क्षति की बात करें तो ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (RRDA) की 254 से अधिक सड़कों एवं पुलों को क्षति पहुंची है। इसके अतिरिक्त:
- 293 मकान पूरी तरह नष्ट
- 3687 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त
- कुल 3980 मकानों को नुकसान
मौसम पूर्वानुमान: अगस्त में सक्रिय रहेगा मानसून
मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि 10 अगस्त तक हल्की से मध्यम वर्षा जारी रहेगी। वर्तमान में कोई बड़ा मौसमी सिस्टम सक्रिय नहीं है, लेकिन अगस्त के दूसरे सप्ताह से सक्रियता बढ़ने की संभावना है। इससे पूरे महीने के भीतर सामान्य वर्षा कोटा पूर्ण होने की आशा है।
ग्वालियर, मुरैना और भिंड में यलो अलर्ट
मंगलवार को इन तीन जिलों में भारी वर्षा का यलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं भोपाल में मौसम स्पष्ट है और दिनभर धूप रहने की संभावना है।
बाढ़ जैसी स्थिति: पूर्वी मध्यप्रदेश प्रभावित
गत सप्ताह जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर जैसे पूर्वी संभागों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी रही। रायसेन में बेतवा नदी ने रौद्र रूप ले लिया था और मंदिर, खेत एवं पुल जलमग्न हो गए थे।
उत्तरप्रदेश सीमा से लगे चित्रकूट में भी यमुना नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से दुकानों में पानी भर गया।
महत्वपूर्ण शहरों का बारिश रिकॉर्ड
| शहर | सर्वाधिक मासिक वर्षा | 24 घंटे में सर्वाधिक वर्षा |
|---|---|---|
| भोपाल | 35 इंच (2006) | 12 इंच (14 अगस्त 2006) |
| इंदौर | 28 इंच (1944) | 10.5 इंच (22 अगस्त 2020) |
| ग्वालियर | 28 इंच (1916) | 8.5 इंच (10 अगस्त 1927) |
| जबलपुर | 44 इंच (1923) | 13 इंच (20 अगस्त 1923) |
| उज्जैन | 35 इंच (2006) | 12 इंच (10 अगस्त 2006) |
मध्यप्रदेश में मानसून इस वर्ष अब तक सामान्य से अधिक रहा है, जिससे खेती को राहत जरूर मिली है, लेकिन इसके साथ बाढ़ और जनहानि की स्थिति ने चिंता बढ़ाई है। अगस्त में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए प्रशासनिक तैयारियों को सतर्क करने की आवश्यकता है।




