जबलपुर के सकरा गांव में एक सिरफिरे युवक ने शादी से इनकार पर नाबालिग छात्रा की हत्या कर दी। आरोपी छत काटकर घर में घुसा और कुल्हाड़ी से वार किए।

मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है। महज 17 साल की एक छात्रा, जो अपने करियर के सपने संजो रही थी, उसे एक युवक ने इसलिए मार डाला क्योंकि उसने शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। युवक ने घर की छत काटी, अंदर घुसा और कुल्हाड़ी से हमला करके उसकी जान ले ली। पूरे गांव में मातम का माहौल है और आरोपी फरार है।
रात के सन्नाटे में घुसा घर में, जानलेवा हमला कर भागा
सोमवार और मंगलवार की रात करीब 3:30 बजे का समय था, जब गांव सकरा में यह खौफनाक वारदात घटी। नाबालिग लड़की अपनी दो छोटी बहनों के साथ कमरे में सो रही थी। आरोपी राकेश सिंह, जो गांव में ही मजदूरी करता है, घर की छत को काटकर भीतर घुसा और एक कोने में छिप गया। जैसे ही लड़की वॉशरूम जाने के लिए उठी, उसने अचानक उस पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया।
गले और सीने पर किए गए तीन तीखे वारों ने लड़की की मौके पर ही जान ले ली। चीख सुनकर छोटी बहन जाग गई और उसने शोर मचाया, जिसके बाद राकेश भाग निकला। जब तक गांव वाले और परिजन इकट्ठा हुए, तब तक लड़की की सांसे थम चुकी थीं।
लड़की थी तेज़, वकील बनने का था सपना
मृतक छात्रा पढ़ाई में अव्वल थी। उसने हाल ही में 10वीं कक्षा फर्स्ट डिवीजन में पास की थी और 11वीं में एडमिशन लिया था। उसका सपना था कि वह लॉ की पढ़ाई करके वकील बने। घर वाले और शिक्षक उसकी मेहनत और लगन के कायल थे। ग्रामीणों ने बताया कि वह बेहद शालीन और जिम्मेदार स्वभाव की थी। रोज़ 10 किलोमीटर दूर बस से स्कूल जाती थी और कभी किसी से उलझती नहीं थी।
आरोपी करता था पीछा, मां से मांगी थी लड़की का हाथ
राकेश सिंह, जिसकी उम्र 22 साल बताई जा रही है, उसी गांव में रहता है और पहले भी कई बार छात्रा को स्कूल आते-जाते छेड़ चुका था। जुलाई 2025 में उसने लड़की की मां से उसकी शादी की बात कही थी, लेकिन मां ने यह कहकर इनकार कर दिया था कि उनकी बेटी पढ़ाई करना चाहती है और अभी शादी नहीं करेगी। इस बात से राकेश बेहद नाराज हो गया था।
धमकियों का सिलसिला जारी था, परिवार ने नहीं दी गंभीरता
कुछ दिन पहले आरोपी ने स्कूल जाते समय लड़की को रास्ते में रोक लिया था और दो टूक शब्दों में धमकी दी थी कि अगर शादी से मना किया तो जान से मार देगा। लड़की ने यह बात घर आकर मां को बताई, लेकिन मां ने लोक-लाज के चलते चुप रहने की सलाह दी। शायद उन्हें अंदेशा नहीं था कि यह अनदेखी इतनी भारी पड़ेगी।

तीसरे नंबर की बेटी थी, स्कूल के अलावा कहीं नहीं जाती थी
नाबालिग कुल पांच बहनों में तीसरे नंबर पर थी। वह घर से स्कूल और स्कूल से घर तक ही सीमित रहती थी। दोस्तों से ज्यादा किताबों में ध्यान रहता था। वह किसी से ज्यादा घुलती-मिलती नहीं थी। मां-बाप को उस पर गर्व था। उसकी मृत्यु से पूरा परिवार सदमे में है और पिता खुद को कोसते नहीं थक रहे।
पिता की चीख ने तोड़ा हर दिल
पोस्टमॉर्टम के बाद जब शव घर पहुंचा, तो परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था। पिता ने बिलखते हुए कहा, “अगर हमने उसकी बातें सुनी होतीं, अगर समाज से डरकर उसे चुप न करवाया होता, तो आज वह हमारे साथ होती। हमने खुद अपनी बेटी को खो दिया।” गांव के लोग भी इस बात से आहत हैं कि एक होनहार बच्ची की जान इतनी बेरहमी से ले ली गई।
फरार है आरोपी, तलाश में जुटी पुलिस
घटना के बाद से ही आरोपी फरार है। पाटन थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम लगातार छापे मार रही है। गांव और आसपास के इलाकों में दबिश दी जा रही है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी को आरोपी के बारे में जानकारी मिले, तो तुरंत थाने को सूचित करें।
यह घटना केवल एक हत्या नहीं है, बल्कि यह समाज की उस चुप्पी की भी हत्या है जो लड़कियों की तकलीफों को नजरअंदाज करती है। यह सवाल खड़ा करती है कि क्या एक लड़की की ‘ना’ को अब भी समाज सुनने को तैयार नहीं?




