रतलाम में तहसीलदारों की हड़ताल से थमा प्रशासन, न्यायिक कार्य प्रणाली का विरोध

मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में प्रशासनिक मशीनरी ठहर गई है। तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने न्यायिक व गैर-न्यायिक कामों के अलगाव के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल की शुरुआत कर दी है। इस विरोध ने आमजन के जरूरी कार्यों को भी रोक दिया है।

धरना स्थल पर अधिकारियों की गूंज

कलेक्ट्रेट परिसर में टेंट गाड़ कर अधिकारी प्रदर्शन कर रहे हैं। पहले दिन का प्रदर्शन तीव्र रहा, जिसमें नारेबाजी से लेकर सरकार की नीतियों की आलोचना हुई। तहसील स्तर से लेकर जिला स्तर तक के सभी अधिकारी इस प्रदर्शन में शामिल हुए हैं।

जनता के काम ठप, प्रमाणपत्र और विवाद लंबित

राजस्व से जुड़े अहम दस्तावेज जैसे जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र और भूमि विवादों की सुनवाई जैसी सेवाएं ठप हो गई हैं। अधिकारी केवल आपदा प्रबंधन के मामलों में सक्रिय रहेंगे। इससे नागरिकों को भारी असुविधा हो रही है।

विभाजन नीति पर अधिकारियों का ऐतराज़

सैलाना तहसील के प्रभारी कूलभूषण शर्मा का कहना है कि इस नीति से व्यवस्था बिगड़ेगी। न्यायिक मामलों में अधिकारी सीमित हो जाएंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय की पहुंच मुश्किल हो जाएगी। सरकार की यह नीति व्यावहारिक नहीं बल्कि प्रशासनिक भ्रम पैदा करने वाली है।

शासकीय वाहन भी सौंपे, आंदोलन का सख्त रुख

तहसीलदारों ने अपने शासकीय वाहन तक लौटाकर सरकार को कड़ा संदेश दिया है। यह साफ संकेत है कि अब अधिकारी पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। जब तक सरकार अपनी नीति वापस नहीं लेती, हड़ताल जारी रहेगी।

ट्रेनिंग में लगे नायब तहसीलदारों को बाहर रखा

इस आंदोलन में केवल वे अधिकारी शामिल हैं जो कार्यरत हैं। प्रशिक्षणकाल के नायब तहसीलदार हड़ताल से बाहर हैं। प्रशासन द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था लागू की गई है, लेकिन इसके प्रभाव बहुत सीमित हैं।

नेतृत्व और समर्थन

प्रदर्शन की अगुवाई नायब तहसीलदार आशीष उपाध्याय, पटवारी संघ के लक्ष्मीनारायण पाटीदार और अधिवक्ता सतीश पुरोहित ने की। सभी ने मिलकर सरकार की नीति को वापस लेने की मांग की और आंदोलन को तेज करने का संकेत दिया।

संभावित प्रभाव और आगे की रणनीति

अगर सरकार जल्द समाधान नहीं करती, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी हो सकता है। अधिकारी न्यायिक कार्यों के साथ-साथ प्रशासनिक ढांचे को भी प्रभावित करेंगे। सरकार के लिए यह बड़ा संकेत है कि नीतियों को जमीनी हकीकत से जोड़कर ही लागू करना चाहिए।

इस हड़ताल ने ना सिर्फ प्रशासन को बाधित किया है बल्कि शासन को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।

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