भोपाल। प्रदेश की मोहन सरकार ने मंगलवार को हुई मंत्रिमंडलीय बैठक में कई नीतिगत फैसलों को मंजूरी दी। मऊगंज और पांढुर्णा जैसे नवगठित जिलों में भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालयों के निर्माण के लिए सरकारी जमीन आवंटित करने का बड़ा निर्णय लिया गया। वहीं दूसरी ओर, जबलपुर के रांझी क्षेत्र में कर्मचारी राज्य बीमा निगम का 100 बिस्तरों वाला अस्पताल बनाने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई।

यह बैठक विधानसभा भवन स्थित कैबिनेट हॉल में संपन्न हुई, जिसकी अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की। इस दौरान राज्य के विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और ऊर्जा उत्पादन से जुड़े प्रस्तावों को स्वीकृति मिली।
दो नए जिलों में बीजेपी कार्यालयों के लिए जमीन
राजस्व विभाग के प्रस्ताव पर विचार करते हुए कैबिनेट ने मऊगंज और पांढुर्णा जिलों में पार्टी कार्यालयों के लिए सरकारी भूमि प्रदान करने का निर्णय लिया। मऊगंज में खसरा नंबर 29/12 से 0.100 हेक्टेयर और पांढुर्णा में चिन्हित स्थान पर जमीन आवंटित की गई है। यह कदम भाजपा की सांगठनिक मजबूती और स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली कार्यप्रणाली स्थापित करने की मंशा को दर्शाता है।
प्रदेश में हाल ही में गठित नए जिलों में यह पहला अवसर है जब राजनीतिक दलों को कार्यालय निर्माण हेतु शासकीय भूमि दी गई है। यह निर्णय सरकार और संगठन के बीच सामंजस्य को और गहरा करेगा।
जबलपुर में मिलेगा कर्मचारियों को नया अस्पताल
कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), जो कि भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के अधीन है, को जबलपुर के रांझी तहसील स्थित रिछाई गांव में अस्पताल निर्माण के लिए 5 एकड़ भूमि आवंटित की गई है।
इस अस्पताल के निर्माण से सरकारी और संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही यह संस्थान क्षेत्रीय स्वास्थ्य ढांचे को भी मज़बूती देगा। ESIC अस्पतालों की सेवा गुणवत्ता के लिए यह आधिकारिक स्रोत अधिक जानकारी प्रदान करता है।
मुरैना की सौर ऊर्जा परियोजना को मंजूरी
कैबिनेट ने एक और अहम निर्णय में मुरैना जिले में प्रस्तावित 600 मेगावाट क्षमता वाली सोलर पावर एवं एनर्जी स्टोरेज परियोजना को राज्य सरकार की गारंटी प्रदान करने की मंजूरी दी। यह परियोजना मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड को बिजली आपूर्ति हेतु अनुबंधित की जाएगी।
ऊर्जा उत्पादन की दिशा में यह कदम प्रदेश की आत्मनिर्भरता को और प्रगाढ़ करेगा। साथ ही, भविष्य की ऊर्जा मांगों को पूरा करने में सहायक सिद्ध होगा।
शहरी अधोसंरचना और सहकारिता क्षेत्र में सुधार
बैठक में शहरी अधोसंरचना विकास योजना के चौथे चरण को भी मंजूरी प्रदान की गई है। इस योजना के अंतर्गत नगरीय निकायों में सड़क, जलप्रदाय, ड्रेनेज जैसे बुनियादी ढांचे को आधुनिक रूप दिया जाएगा।
इसके साथ ही सहकारिता विभाग के अंतर्गत भोपाल में पीएमयू सेल की स्थापना को भी स्वीकृति मिली, जो सहकारी संस्थाओं के प्रशासनिक कार्यों की निगरानी और संचालन में सहायता प्रदान करेगा।
पुलिसकर्मियों और पेंशन से संबंधित निर्णय
कैबिनेट बैठक में सात पुलिस कर्मचारियों के लंबित सेवा मामलों और पेंशन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के बाद संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। यह निर्णय कर्मचारियों के हित में अहम माना जा रहा है।
इससे पहले भी सरकार ने कर्मचारियों की भलाई हेतु कई योजनाओं की घोषणा की है, जिससे प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और संतुलन स्थापित हुआ है।
नवगठित जिलों की प्रगति की दिशा में पहल
राज्य में नवगठित जिलों जैसे मऊगंज और पांढुर्णा में संरचनात्मक विकास को गति देने के लिए इस प्रकार के फैसले अत्यंत आवश्यक माने जा रहे हैं। सरकारी कार्यालयों, स्वास्थ्य सेवाओं और राजनीतिक संगठनात्मक ढांचे की स्थापना से ये क्षेत्र प्रशासनिक रूप से अधिक सक्षम बनेंगे।
सरकार की यह कोशिश है कि नवगठित जिलों को शीघ्र ही उन सभी संसाधनों से लैस किया जाए जो किसी पूर्ण विकसित जिले के पास होते हैं।
इन सभी निर्णयों से स्पष्ट होता है कि सरकार एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रही है – चाहे वो स्वास्थ्य हो, संगठन, ऊर्जा या अधोसंरचना।




