भाजपा नेता के बेटे पर एसिड अटैक की धमकी का केस

इंदौर। शहर की कानूनी व्यवस्था को चुनौती देती एक बड़ी घटना सामने आई है, जिसमें एक महिला वकील को बीजेपी नेता के बेटे ने जान से मारने और एसिड अटैक की धमकी दी है। महिला वकील ने पुलिस थाने पहुंचकर न सिर्फ इसकी शिकायत दर्ज कराई, बल्कि अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की भी मांग की है।

इस मामले में आरोपी हैं कमाल खान के बेटे माज खान, जो पहले भी विवादित रह चुके हैं। पीड़िता वकील का नाम माधवी जाधव है, जो पालदा क्षेत्र की निवासी हैं और जिला कोर्ट से जुड़ी हैं। वे कई गंभीर आपराधिक मामलों की वकालत करती हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी ने उन्हें फोन कर धमकाया और केस से हटने के लिए जबरन दबाव बनाने की कोशिश की।

घटना 22 जुलाई की है, जब माज खान ने उन्हें कॉल किया और कहा कि अगर उन्होंने केस नहीं छोड़ा तो अंजाम भुगतना पड़ेगा। कॉल पर बहस के बाद आरोपी ने धमकी दी कि वह किसी को एसिड फिकवाकर उनकी जिंदगी बर्बाद कर देगा। इससे पहले 12 जुलाई को भी माज खान ने केस की पीड़िता को डराने की कोशिश की थी।

इतना ही नहीं, 3 अगस्त को वकील सुदर्शन शर्मा, जो माधवी के सहयोगी हैं, को भी फोन आया। कॉल करने वाले ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए कहा कि वो सभी वकीलों की निजी जानकारी रखता है और किसी को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

माधवी ने पुलिस को बताया कि माज खान का आपराधिक इतिहास रहा है। कुछ दिन पहले उन्होंने क्राइम ब्रांच की टीम पर भी हमला करने की कोशिश की थी। घटना में प्रधान आरक्षक दीपक थापा घायल हो गए थे, जब माज खान ने अपनी कार उनकी बाइक पर चढ़ाने की कोशिश की।

इस घटना की पुष्टि करते हुए तुकोगंज थाने में मामला दर्ज किया गया। 26 जुलाई को माज खान कार (MP09-WB-0860) में संदिग्ध पदार्थ लेकर जा रहा था, जिसकी जानकारी मुखबिर से पुलिस को मिली थी। कार रोकने पर उसने गाड़ी सीधे पुलिस टीम पर चढ़ा दी।

अब महिला वकील द्वारा दी गई शिकायत पर आजाद नगर थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस अफसरों का कहना है कि प्रारंभिक जांच के बाद उचित कानूनी धाराओं में प्रकरण दर्ज किया जाएगा। वकील की ओर से सौंपे गए सबूतों की जांच की जा रही है।

यह मामला सिर्फ एक धमकी का नहीं, बल्कि सिस्टम में राजनीतिक प्रभाव के दखल का प्रतीक बन चुका है। महिला वकील का कहना है कि वह अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं और उन्हें तत्काल सुरक्षा की आवश्यकता है।

पुलिस प्रशासन के सामने अब यह चुनौती है कि वह इस मामले को निष्पक्षता से सुलझाए और पीड़िता को न्याय दिलाए। साथ ही यह घटना वकीलों की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।

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