खजूरी बाजार में भीषण आग, राख हुईं 4 दुकानें

खजूरी बाजार इंदौर में बुधवार सुबह लगी आग से चार दुकानें जल गईं। लाखों की स्टेशनरी और राखियों का नुकसान हुआ। नगर निगम ने तुरंत जर्जर बिल्डिंग गिराने की कार्रवाई की।

इंदौर के सबसे पुराने और भीड़भाड़ वाले बाजारों में से एक खजूरी बाजार बुधवार की सुबह आग की लपटों में घिर गया। सुभाष चौक के पास स्थित चार दुकानों में सुबह-सुबह ऐसी आग लगी कि कुछ ही देर में लाखों का सामान जलकर खाक हो गया। हादसे की खबर मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग मदद को दौड़ पड़े।

जलती दुकानों से उठता धुआं, फायर ब्रिगेड की कोशिश

ये हादसा उस वक्त हुआ जब अधिकतर दुकानें बंद थीं। सुबह करीब 6 बजे खंडेलवाल ब्रदर्स की स्टेशनरी की दुकान से आग की शुरुआत हुई। कुछ ही मिनटों में वो आग फैलते-फैलते तीन और दुकानों तक जा पहुंची। वहां मौजूद पेपर, किताबें, राखियों और अन्य सामग्री ने आग को और भड़का दिया।

दमकल विभाग को जैसे ही सूचना मिली, मौके पर पांच से ज्यादा गाड़ियां भेजी गईं। फायर ब्रिगेड के जवानों ने दो घंटे की मशक्कत के बाद किसी तरह आग पर काबू पाया। इस बीच सर्राफा थाना पुलिस भी पहुंची और इलाके को खाली कराया गया ताकि राहत कार्य बिना रुकावट हो सके।

इन दुकानों में मुख्य रूप से स्टेशनरी, बही-खाते और राखियों का थोक व्यापार होता है। ये दुकानें महेश, जगदीश और सतीश खंडेलवाल नामक व्यापारियों की थीं। सभी एक ही परिवार से जुड़े हुए हैं। दुकानों में त्योहार के कारण राखियों का स्टॉक भरा हुआ था, जिससे नुकसान भी बहुत ज्यादा हुआ।

जल चुकी दुकानें और धुआं उड़ाते मलबे

स्थानीय लोगों ने बताया कि दुकानें काफी समय से पुराने स्ट्रक्चर में बनी थीं। ऊपर से जो मकान बने हैं, वो भी कई साल पुराने और कमजोर हालत में थे। आग लगने और गर्मी से उन बिल्डिंग्स में दरारें आ गईं। पुलिस और दमकल कर्मियों ने तुरंत नगर निगम को इसकी जानकारी दी।

नगर निगम की टीम थोड़ी देर में मौके पर पहुंची और जर्जर हिस्से को गिराने का काम शुरू कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि पहले ही इन बिल्डिंग्स को लेकर नोटिस दिया गया था, लेकिन कार्रवाई नहीं हो पाई थी। अब आग लगने के बाद मामला ज्यादा गंभीर हो गया था, इसलिए उसी समय कार्यवाही शुरू की गई।

व्यापारियों का कहना है कि ये इलाका बेहद व्यस्त रहता है, खासकर त्योहारों के दौरान। ऐसे में प्रशासन को पहले से यहां के बिजली इंतजामों और भवनों की स्थिति पर निगरानी रखनी चाहिए थी। अगर समय रहते जर्जर बिल्डिंग हटाई गई होती तो नुकसान थोड़ा कम होता।

स्थानीय व्यापारी संघ ने भी प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित दुकानदारों को आर्थिक मदद दी जाए, ताकि वे फिर से व्यापार शुरू कर सकें। त्योहार से ठीक पहले हुए इस हादसे से बाजार में मायूसी है। कई लोगों का कहना है कि नुकसान की भरपाई कर पाना आसान नहीं होगा।

मौके पर पहुंचे दुकान मालिकों ने बताया कि वे जैसे ही दुकान की ओर दौड़े, तब तक अंदर सब कुछ जल चुका था। बही-खाते, कस्टमर ऑर्डर और राखियों का बड़ा स्टॉक पूरी तरह से खाक हो चुका है। आग इतनी भयंकर थी कि किसी को पास तक जाने की हिम्मत नहीं हुई।

फायर डिपार्टमेंट का कहना है कि अगर आग कुछ और समय तक फैलती रहती तो यह और दुकानों को भी अपनी चपेट में ले सकती थी। उनके मुताबिक, खजूरी बाजार जैसी संकरी गलियों में दमकल पहुंचाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। संकरी सड़कें और गलत पार्किंग से देरी होती है, जिससे नुकसान बढ़ जाता है।

फिलहाल आग कैसे लगी, इसका स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है लेकिन शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने पूरे घटनास्थल को सील कर दिया है और फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया है ताकि सही कारण पता चल सके।

व्यापारियों में भय का माहौल है। खासकर उन दुकानदारों में जो आसपास की इमारतों में व्यापार कर रहे हैं। लोगों की मांग है कि अब प्रशासन को तुरंत पूरे बाजार की इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराना चाहिए ताकि भविष्य में कोई और हादसा न हो।

नगर निगम अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अब कोई भी जर्जर भवन नजर आते ही तुरंत गिरा दिए जाएंगे और मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आग ने एक बार फिर इस बात को साफ कर दिया है कि लापरवाही और पुरानी इमारतों को नजरअंदाज करना कितना महंगा साबित हो सकता है।

इस हादसे ने त्योहार के ठीक पहले व्यापारियों को तगड़ा झटका दिया है। राखियों के बड़े थोक ऑर्डर कैंसिल हो सकते हैं, जिसका असर उनके पूरे साल की आमदनी पर पड़ सकता है। कई व्यापारी अब नए स्टॉक और दुकान तैयारियों के बारे में सोच भी नहीं पा रहे हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि ऐसे बाजारों में फायर सेफ्टी सिस्टम अनिवार्य बनाए जाएं और समय-समय पर जांच की जाए। नहीं तो ये हादसे दोबारा भी हो सकते हैं और शायद तब नुक़सान और भी बड़ा हो।

अब जब मलबा हटाया जा रहा है और आग पूरी तरह बुझ चुकी है, तब दुकानदार राख के ढेर में अपना बचा-खुचा सामान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। कई के चेहरों पर मायूसी है, तो कुछ लोग एक बार फिर से नई शुरुआत की हिम्मत जुटा रहे हैं।

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