खनन घोटाला: विधायक संजय पाठक की कंपनियों पर 443 करोड़ की वसूली तय

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर खनन घोटाले की गूंज सुनाई दी जब विधानसभा में एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़ी तीन खनन कंपनियों ने स्वीकृति से ज्यादा खनिज निकाला और शासन को निर्धारित राशि नहीं चुकाई। अब सरकार इन कंपनियों से 443 करोड़ से अधिक की वसूली करने जा रही है। इस रकम पर जीएसटी जोड़कर कुल देनदारी और भी ज्यादा हो सकती है।

इस पूरे मामले ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, क्योंकि जिन कंपनियों की जांच हुई है, उनका संबंध सीधे तौर पर एक सत्ताधारी पार्टी के विधायक से जुड़ा है। सवाल अब यह है कि क्या कार्रवाई सख्ती से आगे बढ़ेगी या यह भी किसी और मामले की तरह कागजों में दब कर रह जाएगा।

तीन खनन कंपनियों पर है मामला

जानकारी के अनुसार, सिहोरा क्षेत्र (जबलपुर) में संचालित आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन, निर्मला मिनरल्स और पैसिफिक एक्सपोर्ट नामक तीन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने निर्धारित सीमा से कहीं अधिक खनन किया। इसके बावजूद सरकार को लगभग 1000 करोड़ रुपये की राशि जमा नहीं की गई।

इस मामले में 31 जनवरी 2025 को आशुतोष मनु दीक्षित द्वारा ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में स्पष्ट तौर पर इन तीनों कंपनियों द्वारा नियमों के उल्लंघन का उल्लेख किया गया था।

जांच दल ने 443 करोड़ की वसूली तय की

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मध्यप्रदेश खनिज साधन विभाग ने 23 अप्रैल को एक विशेष जांच टीम गठित की। यह टीम 6 जून 2025 को अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप चुकी है। रिपोर्ट में बताया गया कि तीनों कंपनियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए खनन सीमा से बाहर जाकर कार्य किया और इससे राज्य सरकार को राजस्व की भारी हानि हुई।

इस आधार पर इन कंपनियों से 443 करोड़ 4 लाख 86 हजार 890 रुपये की वसूली का आदेश दिया गया है। इसके अलावा रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इस वसूली पर जीएसटी अलग से लगाया जाएगा, जिससे कुल राशि में और वृद्धि होगी।

कंपनियों ने आरोपों को खारिज किया

हालांकि आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन और निर्मला मिनरल्स की ओर से जारी बयान में इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया गया है। कंपनियों का कहना है कि वे दशकों से खनिज व्यवसाय में कार्यरत हैं और उनके पास लगभग एक सदी का अनुभव है।

उन्होंने दावा किया कि उनकी खदानों में कभी कोई ओवर प्रोडक्शन नहीं हुआ और जितना खनिज निकाला गया, उस पर निर्धारित रॉयल्टी और टैक्स समय पर चुकाया गया। इसके अतिरिक्त पूर्व में इस संबंध में जब जांच हुई थी, तो कोर्ट ने विभाग के आदेश को तथ्यहीन मानते हुए खारिज कर दिया था।

बिना निरीक्षण बनी रिपोर्ट: कंपनियों का आरोप

कंपनियों ने यह भी दावा किया कि जांच टीम ने मौके पर जाकर निरीक्षण नहीं किया, न ही उनसे किसी तरह का संवाद स्थापित किया। उनके अनुसार, रिपोर्ट केवल अनुमानित डेटा पर आधारित है, जिसमें ग्राउंड रियलिटी की पूरी तरह अनदेखी की गई है।

उन्होंने विभाग को पत्र भेजकर निष्पक्ष सुनवाई की मांग की, लेकिन अब तक कोई उत्तर नहीं मिला है। कंपनियों का कहना है कि इस तरह की रिपोर्ट से वर्षों की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े होते हैं, जबकि उनके खिलाफ अब तक कोई टैक्स चोरी या अवैध खनन का प्रमाण नहीं मिला है।

कांग्रेस ने उठाया सवाल

कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह और हेमंत कटारे ने मंगलवार को विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पूछा कि जब शिकायत दर्ज हुई थी, तो सरकार ने क्या कदम उठाए?

प्रश्नकाल के दौरान अवैध खनन से जुड़े चार प्रमुख सवाल उठे, जिनमें यह मामला सबसे गंभीर था। सूत्रों के मुताबिक जांच दल ने सैटेलाइट इमेजरी और भारतीय खनन ब्यूरो की रिपोर्ट्स का अध्ययन किया और यह निष्कर्ष निकाला कि स्वीकृति से अधिक खनन हुआ है।

विशेषज्ञों की राय

खनिज विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जांच निष्पक्ष हुई है और आरोप सही पाए गए हैं, तो यह न केवल एक बड़ा आर्थिक घोटाला है बल्कि शासन तंत्र की कमजोरी का संकेत भी है। खनिज संसाधन राज्य की अमूल्य संपत्ति हैं और इस तरह का शोषण सार्वजनिक हितों के साथ विश्वासघात है।

उनका यह भी कहना है कि अब आवश्यक हो गया है कि सरकार केवल वसूली आदेश पर रुक कर न रह जाए, बल्कि दोषियों पर सख्त कानूनी कार्यवाही भी करे, ताकि भविष्य में कोई और इस तरह के दुस्साहस की हिम्मत न करे।

यह मामला राजनीतिक, प्रशासनिक और कारोबारी तीनों ही स्तरों पर गंभीर चिंतन की मांग करता है। अगर भाजपा के एक मौजूदा विधायक की कंपनियों पर इतनी बड़ी रकम का बकाया है, और आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की नीति और मंशा की भी अग्नि परीक्षा होगी।

अब देखना यह है कि यह मामला कितनी पारदर्शिता और प्रभावशाली कार्रवाई के साथ आगे बढ़ता है, या फिर यह भी किसी अन्य बड़े घोटाले की तरह समय के साथ भुला दिया जाएगा।

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