रतलाम कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान एक वृद्ध महिला के साथ प्रशासनिक अफसरों द्वारा की गई कथित बदसलूकी पर विवाद खड़ा हो गया है। महिला 2012 से फसल व पट्टे की राशि के लिए लड़ाई लड़ रही है।
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रतलाम, मध्यप्रदेश – मंगलवार को जनसुनवाई के मंच पर एक असहाय बुजुर्ग महिला का गुस्सा फूट पड़ा, जब उसे लगातार 12 वर्षों से लंबित मामलों में कोई न्याय नहीं मिला। मामला तब गरमा गया, जब अधिकारियों ने उसे जनसुनवाई हॉल से बाहर कर दिया।
भोई मोहल्ला काजीपुरा निवासी अमरी बाई जलान्द्रिया ने मीडिया को बताया कि वर्ष 2012 में उन्होंने कल्लूखेड़ी में पट्टे और सिंगाड़े की फसल के लिए ₹20,000 तहसील में जमा किए थे। लेकिन न तो उन्हें ज़मीन आवंटित की गई, न ही राशि लौटाई गई। इस मामले को लेकर उन्होंने कई बार अधिकारियों से संपर्क किया और भोपाल तक का सफर भी किया, पर समस्या जस की तस बनी हुई है।
जनसुनवाई के दौरान जब उन्होंने अधिकारियों से अपनी बात रखना चाहा, तो महिला का आरोप है कि एसडीएम अनिल भाना, तहसीलदार ऋषभ ठाकुर और महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें धक्का देकर बाहर निकाल दिया। महिला ने भावुक होते हुए कहा, “अगर सुनवाई नहीं होनी है तो जनसुनवाई बंद कर दीजिए… सब कुछ पैसों से ही चलता है।”
जानकारी के अनुसार, महिला को हॉल से बाहर निकालने के बाद एसडीएम ने उन्हें अपने कक्ष में बुलाकर बात की और समझाइश देने का प्रयास किया।
इतना ही नहीं, अमरी बाई ने यह भी बताया कि वह इंदिरा मत्स्योद्योग सहकारी संस्था मर्यादित मलवासा की सक्रिय सदस्य हैं, लेकिन संस्था में वर्षों से चुनाव नहीं हो रहे हैं। अध्यक्ष और पदाधिकारी मिलकर मनमाने निर्णय ले रहे हैं, जबकि आम सदस्यों को भागीदारी का कोई अवसर नहीं दिया जा रहा।
महिला ने पहले भी कलेक्टर से मिलकर शिकायत की थी, जिस पर उन्हें एक माह बाद फिर से आने को कहा गया था। लेकिन मंगलवार को जब वह वापस पहुंचीं, तो उनकी कोई सुनवाई नहीं की गई।
इस घटना से प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लग गया है। जब कोई बुजुर्ग महिला वर्षों तक बार-बार एक ही मांग को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाती है और अंत में उसे बाहर निकाल दिया जाता है, तो यह गंभीर चिंतन का विषय बन जाता है।




